थोक महंगाई दर कई वर्षों के निचले स्तर पर आई, जुलाई में 1.08 फीसद रही

जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई (WPI Inflation) दर कई वर्षों के निम्नतम स्तर पर आ गई। सरकार द्वारा बुधवार को जारी किए आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में थोक मूल्य आधारित महंगाई दर 1.08 फीसद रही। ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी इसकी प्रमुख वजह रही। इस साल जून में WPI Inflation 2.02 फीसद था और जुलाई 2018 में यह 5.27 फीसद था।

सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की महंगाई दर जुलाई में 6.15 रही जो जून में 6.98 फीसद थी। इसी प्रकार, ईंधन और पावर सेगमेंट की थोक महंगाई दर जुलाई में -3.64 फीसद रही जो जून में -2.2 फीसद थी।
जुलाई में खुदरा महंगाई दर में भी नरमी आई और यह 3.15 फीसद रही थी। जून में खुदरा महंगाई दर 3.18 फीसद थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति को तैयार करने में प्राथमिक तौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI Inflation) आधारित महंगाई दर पर गौर करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक फरवरी से अबतक रेपो रेट में 110 आधार अंकों यानी 1.10 फीसद की कटौती कर चुका है। रेपो रेट वह दर है जिसके आधार पर रिजर्व बैंक कॉमर्शियल बैंकों को अल्पावधि के लिए फंड उपलब्ध कराता है।
7 अगस्त को RBI की 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति कमेटी के बयान में कहा गया था कि 2019-20 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की ग्रोथ का अनुमान जून के 7 फीसद से घटाकर 6.9 फीसद किया जाता है।





