अशोक गहलोत सरकार में संसदीय सचिव बनाए जाने की हो रही तैयारी

राजस्थान हाईकोर्ट में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला लंबित है। कांग्रेस भी विपक्ष के रहते हुए तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का विरोध कर चुकी है। लेकिन अब सत्ता में आते ही कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार का रुख बदल गया है। सरकार ने संसदीय सचिवों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि फिलहाल सरकार में एक भी संसदीय सचिव नहीं है, लेकिन कांग्रेस सूत्रों के अनुसार सरकार को समर्थन दे रहे एक दर्जन निर्दलीय विधायकों व दो बसपा विधायकों को खुश करने के लिए संसदीय सचिव बनाए जाने की तैयारी हो रही है।
संसदीय सचिव बनाकर इन विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाएगा। संसदीय सचिव बनाने से पहले ही इस पद के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी कर दी गई है। संसदीय सचिवों का वेतन 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये करने के साथ ही सत्कार भत्ता 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 70 हजार रुपये किया गया है। राज्य विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री, मंत्रियों व विधायकों के वेतन-भत्तों के लिए पारित किए गए विधेयक में संसदीय सचिवों को भी शामिल किया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर दायर की गई है। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए वसुंधरा राजे सरकार में संसदीय सचिवों की नियुक्ति का विरोध किया था। लेकिन अब सरकार को सुरक्षित रखने के लिए संसदीय सचिव बनाने की कवायद शुरू की जा रही है।
कई राज्यों में विवादों में आ चुकी है संसदीय सचिवों की नियुक्ति
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में संसदीय सचिव को लाभ का पद मानते हुए अयोग्य ठहराया गया था। इसी तरह 26 जुलाई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार के 2004 के कानून को रद करते हुए संसदीय सचिवों की नियुक्ति को असंवैधानिक करार दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला चला। 18 जुलाई, 2017 को पंजाब-हरियाणा में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया। तेलंगाना में हाईकोर्ट ने इस पर स्टे लगा रखा है। मणिपुर और नागालैंड में भी संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला विवादों में आया था।





