मांसाहार बन रहा है ग्लोबल वार्मिंग का कारक: डॉ. अनिल झा

लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में सोमवार को विवि के सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज में निदेशक, प्रो. मनीष गौड़ की अध्यक्षता में ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट एंड डायरेक्शन्स फॉर यूथ’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल झा बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे।
समय प्रबंध, योग और अध्यात्म से जुड़ाव दूर कर सकता है तनाव
डॉ. झा ने कहा कि आज का युवा सोशल साइट्स के व्यसन में है, जिससे उसके दैनिक जीवन की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेस एक मात्र कारण समय का प्रबंधन है, जोकि जीवन शैली सम्बन्धित अनुप्रयोगों दे दूर रहने के कारण संभव नहीं हो पा रहा है। युवाओं को योग, अध्यात्म और पौराणिक ग्रंथों से जुड़ाव का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि जीवन को प्रबंधित के सरल उपकरणों में से एक हैं।
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ग्लोबल वार्मिंग के लिए 51 प्रतिशत मीट इंडस्ट्री जिम्मेदार
उन्होंने ने कहा कि हमें शाकाहारी भोजन ही कराना चाहिए, क्योंकि मांसाहार ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है उन्होंने बताया कि यूके के पूर्व प्रधानमंत्री जान मेजर ने कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए 51 प्रतिशत मीट इंडस्ट्री जिम्मेदार है। जीवन में सकारात्मक बदलाव के प्रयास हमें सफलता की ओर अग्रसर करते हैं।
हमारी संस्कृति सैदव ही शोधकर्ताओं की रही है ऋषि से ही रिसर्चर बना
सकारात्मक सोच के व्यक्ति हमेशा अच्छे शोध कर्ता साबित होते हैं, उदाहरण के लिए डॉ कलाम साहब। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति सैदव ही शोधकर्ताओं की रही है ऋषि से ही रिसर्चर बना है। जो कार्य पौराणिक काल में ऋषि किया करते थे वह वर्तमान में रिसर्चर कर रहे हैं। इस अवसर पर सीएएस के समस्त आचार्य, लगभग 100 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। व्याख्यान विधिवत सम्पन्न हो गया।





