भारत के इस योद्धा का नाम सुनते ही भाग खड़ी होती थी पाक फ़ौज, जानें इस योद्धाबारे में…

भारत देश की धरती पर एक से बढकर एक योद्धाओ ने जन्म लिया हैं । इनमे से कई योद्धा तो ऐसे भी हुए हैं जिनके शौर्य और पराक्रम देखकर दुश्मन के ना केवल होश उड़ गये बल्कि आज भी दुश्मनों देश में इन महावीरो की वीरगाथा सुनाई जाती हैं । आज भी हम आपको एक ऐसे महावीर के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके शौर्य और पराक्रम ने ना केवल वीरता की एक परिभाषा लिखी बल्कि मरनोपरांत परमवीर चक्र पाकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया ।ये कोई और नही बल्कि कारगिल का शेर के नाम से जाने वाले अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा हैं ।

9 सितंबर 1974 को पालपुर में जी.एल. बत्रा और कमलकांता बत्रा के घर जन्मे कैप्टन विक्रम बत्रा का बचपन का नाम लव था । कैप्टन विक्रम बत्रा को रामचरितमानस का निरंतर जाप करते थे लिहाजा इसी से प्रभावित होकर उन्होंने अपने जुड़वाँ बेटो के नाम लव कुश रखे थे । जिनमे कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम लव था और उनके भाई विशाल का नाम कुश ।अपने जीवन के शुरुवाती दिनों से कैप्टन विक्रम बत्रा के मन में देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी थी ।

उ.कोरिया पर पाबंदी हटाने में अमेरिका से सहयोग के पक्ष में राष्ट्रपति मून

माता से प्रारम्भिक शिक्षा लेकर जब कैप्टन विक्रम बत्रा स्कुल गये तो ना केवल पढाई बल्कि खेलकूद में भी उनके जैसा कोई नही रहा । अपनी पढाई पूरी करने के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा की नौकरी हांगकांग में मर्चेन्ट नेवी में लग गयी थी लेकिन भारत माता के इस सपूत को ये नौकरी कहाँ रास आने वाली थी क्योकि उन्होंने तो अपना सब कुछ देश को समर्पित करने का अटल इरादा बना लिया था ।

 

लिहाजा यह नौकरी छोड़ कैप्टन विक्रम बत्रा ने इंडियन आर्मी जॉइन कर ली । 1997 में एनडीए करने के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा ने 1999 आते आते कई कमांडो ट्रेनिंग ले ली थी । इसके बाद 1999 में पाकिस्तान ने कारगिल पर हमला बोल दिया । इसमें कैप्टन विक्रम बत्रा ने हम्प व राकी नाब को आजाद करवा दिया और कैप्टन बन गये थे । कारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम शेरशाह रखा गया था ।

ऊँचे ऊँचे पहाडो पर चढकर दुश्मनों को मौत के घाट उतार रहे कैप्टन विक्रम बत्रा का पाकिस्तानी सेना में इतना खौफ भर गया था की जब भी वह सुनते आज शेरशाह आ रहा हैं उनकी पूरी बटालियन भाग खड़ी होती थी । एक पहाड़ी पर विजयी तिरंगा फहराने के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा ने ऊँची आवाज में कह दिया ” ये दिल मांगे मोर ” इसके बाद वह और उनकी ये लाइन पुरे देश में चर्चित हो गयी ।

कारगिल युद्ध दुश्मनों पर आग की तरह बरसते कैप्टन विक्रम का एक कनिष्ठ साथी बुरी तरह घायल हो गया । बाहर से सख्त और करुणामयी ह्रदय रखने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपनी जान की परवाह करते हुए अपने साथी को बचाने का प्रयास किया और उसको पैरो से पकडकर घसीटते हुए कैप में ले जाने की कोशिश की । लेकिन कायर पाकिस्तान सेना की तरफ से चली एक गोली कैप्टन विक्रम बत्रा के सीने में लगी और “जय माता दी” कहते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गये । आदमी साहस और वीरता को देखते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

Back to top button