भस्मासुर से भागकर बिहार की इस गुफा में छिपे थे भोलेनाथ, तब जाकर बची थी जान

गुप्तेश्वर धाम को गुप्ता धाम के नाम से भी जाना जाता है। सावन में एक महीने तक देशभर से हजारों शिवभक्त यहां आकर जलाभिषेक करते हैं। परंपरानुसार बक्सर से गंगाजल लेकर गुप्ता धाम पहुंचने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है। लोग बताते हैं कि विख्यात उपन्यासकार देवकी नंदन खत्री ने अपने चर्चित उपन्यास ‘चंद्रकांता’ में विंध्य पर्वत श्रृंखला की जिन तिलस्मी गुफाओं का जिक्र किया है। संभवत: उन्हीं गुफाओं में गुप्ताधाम की यह रहस्यमयी गुफा भी है।
इसी गुफा में छुपे थे शिव
मान्यता है कि भस्मासुर मां पार्वती के सौंदर्य पर मोहित होकर शिव से मिले वरदान की परीक्षा लेने के लिए उन्हीं के सिर पर हाथ रखने के लिए दौड़ा। वहां से भागकर भोलेनाथ यहां की गुफा के गुप्त स्थान में छुपे थे।
पातालगंगा की कहानी
पहाड़ी पर स्थित इस पवित्र गुफा का द्वार 18 फीट चौड़ा और 12 फीट ऊंचा मेहराबनुमा है। गुफा में लगभग 363 फीट अंदर जाने पर बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसमें सालभर पानी रहता है। श्रद्धालु इसे ‘पातालगंगा’ कहते हैं। गुफा के अंदर प्राचीन काल के दुर्लभ शैलचित्र आज भी मौजूद हैं।
नदी पर पुल बनाने की मांग
वहीं स्थानीय लोग और श्रद्धालुओं की माने तो रास्ते में पड़ने वाली नदी पर चचरा का पुल बनाया गया था। लेकिन पानी का फ्लो तेज होते ही टूट गया। ऐसे में अब श्रद्धालु राज्य सरकार से इस नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। ताकि दर्शनार्थियों को यहां पहुंचने में किसी भी तरह की परेशानी ना हो।
सुगम रास्ते की जरुरत
वहीं अगर हम यहां तक पहुचने के लिए रास्ते की बात करें तो रास्ता पथरीले पहाड़ से होकर गुजरता है। जिससे यहां आने में पर्यटकों को काफी दिक्कत होती है। दर्शनार्थी और साधू सरकार से एक रास्ते की आस में हैं ताकि यह राहें थोड़ी आसान हो जाएं।





