बेरोजगारों को रोजगार के लिए नई सौगात, कर सकेंगे मनचाहा बिजनेस


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रोडमैप में स्कूलों के ड्रॉपआउट स्टूडेंट्स को भी शामिल किया गया है। तमाम ऐसे युवा हैं जो कि किसी न किसी वजह से पांचवीं और आठवीं के बाद स्कूल छोड़ देते हैं। इनके पास न साक्षरता है और न ही कोई स्किल। ऐसे युवाओं को नई राह दिखाने के लिए स्किल्ड बनाया जाएगा।
इसी प्रकार, 405 गांव ऐसे हैं, जिनमें दस व्यक्तियों से कम निवास करते हैं। यह भी लगभग सूनेपन की श्रेणी में हैं। वर्ष 2013 की आपदा और भूकंप के बाद पलायन का सिलसिला इससे भी ज्यादा बढ़ा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक अनुमानित तौर पर करीब तीन हजार गांव खाली हो गए हैं।
प्रदेश में लगातार उद्योगों को पहाड़ चढ़ाने की कवायद चल रही है लेकिन अभी तक 20 प्रतिशत से भी कम उद्योग ही पहाड़ में स्थापित हो पाए हैं। यह सभी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग हैं। कोई बड़ी इंडस्ट्रीज पहाड़ न जाने की वजह से रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पाए। सरकार ने 2008 में हिल पॉलिसी लागू की जो कि 2017 में खत्म होने से पहले ही वर्ष 2015 में एमएसएमई पॉलिसी बन गई। बावजूद इसके पहाड़ उद्योग और रोजगार से दूर है।
यह सुझाव भी शामिल
-जो लोग पहाड़ में अपना काम शुरू करना चाहेंगे, उन्हें आईएयू की ओर से बैंक लिंकेज उपलब्ध की जाएगी। यानी, बैंक से लोन का इंतजाम आसान किया जाएगा।
-पहाड़ में क्षेत्र विशेष में पैदा होने वाली चीजों को औद्योगिकीकरण से जोड़ने के लिए कच्चा माल पहाड़ से आयात किया जाएगा।
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि हमने प्रदेश में ग्राउंड लेवल पर यह रोडमैप तैयार किया है। हमारा मकसद पलायन को खत्म कर परदेस में बस चुके लोगों को उत्तराखंड वापस लाने के साथ ही यहां के बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ना है। जल्द ही हम यह रोडमैप मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।





