नेपाल में चट्टान और उफनती नदी के बीच 20 दिनों से फंसा था कुत्ता

नेपाल में सेती नाम के कुत्ते को नया जीवन मिल गया। 20 दिनों से वो जीवन और मौत के बीच जूझ रहा था। आखिरकार काफी मेहनत के बाद प्रशासन और लोगों की मदद से उसकी जीवन की डोर थाम ली गई।
मामला नेपाल के गोरखा जिले का है। यहां पर एक खड़ी चट्टान और उफनती बूढ़ी गंडकी नदी के बीच जमीन के एक संकरे टुकड़े पर 20 दिनों से फंसा ‘सेती’ नाम का एक कुत्ता, आखिरकार शुक्रवार शाम को बचा लिया गया।
प्रशासन की कोशिश के बाद नाविकों ने बचाया
दो कयाकर्स (नाविकों) ने बारिश और तेज बहाव की परवाह किए बिना उसे सुरक्षित बाहर निकाला। इससे पहले, स्थानीय प्रशासन, पशु कल्याण समूहों और निवासियों ने कुत्ते को एयरलिफ्ट (हवाई मार्ग से निकालने) करने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
सेती, धारचे ग्रामीण नगरपालिका-1 के थाडो भर्यांग निवासी दयाराम कार्की का कुत्ता है जो 11 अक्टूबर को बूढ़ी गंडकी नदी में आई अचानक बाढ़ के दौरान बह गया था। सेती चुमानुबरी और धारचे ग्रामीण नगरपालिकाओं की सीमा के पास, जगत बगर में जमीन के एक अलग-थलग टुकड़े पर जिंदा मिला। पिछले बुधवार को ही स्थानीय लोगों ने उसे देखा।
पानी के पार खाना फेंककर लोग खिला रहे थे खाना
कार्की और स्थानीय युवाओं ने पानी के पार बिस्कुट फेंककर सेती को खाना खिलाया। इस बेसहारा जानवर की हालत को देखते हुए, चुमानुबरी ग्रामीण नगरपालिका, मनासलु कंजर्वेशन एरिया प्रोजेक्ट, गोरखा स्थित पशु चिकित्सा अस्पताल और पशुधन सेवा कार्यालय, ‘एनिमल नेपाल’ और ‘गोरखा जेसीज’ ने मिलकर उसे बचाने का अभियान चलाया।
पर्यटन उद्यमी और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के चुमानुबरी अध्यक्ष धावा ग्यालजेन लामा, स्थानीय निवासी बीरबल घले और ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने पहले हेलीकॉप्टर से कुत्ते को बचाने की संभावना तलाशी थी, लेकिन खराब मौसम और उड़ान की अनुमति मिलने में आ रही दिक्कतों के कारण ऐसा नहीं हो सका।
उफनती नदी को पार कर बचाया
इसके बाद ‘एनिमल नेपाल’ ने धाडिंग स्थित ‘रॉयल बीच कैंप’ से संपर्क किया, जिसने जगत बगर में पेशेवर कयाकर्स और राफ्टर्स की एक टीम भेजी। लगातार हो रही हल्की बारिश और नदी के तेज बहाव के बावजूद, राम सिलवाल और अरुण थापालिया ने कयाक के जरिए उफनती बूढ़ी गंडकी नदी को पार किया और सेती तक पहुंचे।
लोगों ने किया स्वागत
इसके लिए ‘एनिमल नेपाल’ के चेयरमैन नीमा लामा ने धन्यवाद जताया। बचाव दल ने सेती को एक कयाक में रखा और सावधानी से उसे नदी के पार पहुंचाया, जिससे उसे नया जीवन मिला। नदी के दूसरे किनारे पर इंतज़ार कर रहे लामा ने पारंपरिक स्कार्फ, जिन्हें ‘खादा’ कहा जाता है, पहनाकर टीम का स्वागत किया और एक स्कार्फ सेती के गले में भी डाल दिया।





