नागपुर रेलवे स्टेशन परिसर फिर होगा लबालब, बारिश में सड़कों से बहने वाला पानी हो जाता है जमा

नागपुर.नागपुर रेलवे स्टेशन नीचे की ओर है। इसलिए बारिश में सड़कों से बहनेवाला पानी एक साथ जमा हो जाता है। इसे देखते हुए वर्षों पहले यहां तीसरी ड्रेनेज लाइन बनाने की योजना बनाई गई थी। पर इस दिशा में अब तक कोई काम नहीं हुआ। परिसर में जमा पानी निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप आनेवाले दिनों में बारिश के समय स्टेशन परिसर में जलभराव की समस्या हो सकती है। इससे ट्रेनों की आवाजाही के साथ ही यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।

बना था प्रस्ताव
कुछ वर्षों पहले स्टेशन की यह समस्या दूर करने के लिए नागपुर महानगर पालिका की ओर से स्टेशन पर तीसरी ड्रेनेज लाइन बनाने का प्रस्ताव बनाया गया था। इसकी लागत 4 करोड़ 50 लाख थी। इस योजना में 70 प्रतिशत मनपा व 30 प्रतिशत राशि मध्य रेलवे नागपुर मंडल को खर्च करनी थी। प्रस्ताव में पटरियों के नीचे से 6 फीट का पाइप बिछाया जानेवाला था। परिसर में पानी निकासी के लिए कई छोटे-छोटे गटर बनाकर पाइप के एक छोर से इन्हें जोड़ा जाना था। वहीं पाइप का दूसरा छोर स्टेशन के सामने नाले में छोड़ा जाना था। इस सिस्टम से भारी बारिश के बाद भी स्टेशन परिसर में पानी जमा नहीं हो सकता था। जहां पानी जमा होता, वहां से तुरंत निकासी भी हो जाती। रेलवे ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। फिर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। मनपा ने इस प्रस्ताव में राशि देने में दिलचस्पी नहीं िदखाई है। ऐसे में यात्रियों के सुविधा का यह प्रस्ताव आज भी ठंडे बस्ते में है।
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घुटनों तक भर जाता है पानी
नागपुर रेलवे स्टेशन पर रोजाना 100 से अधिक यात्री गाड़ियां व 200 से अधिक मालगाड़ियां आती हैं। रोजाना 30 हजार से ज्यादा यात्री स्टेशन से विभिन्न क्षेत्रों की ओर आवाजाही करते हैं। ऐेसे में यह स्टेशन महत्वपूर्ण है। बाकी मौसम में स्टेशन पर यात्रियों को ज्यादा तकलीफ नहीं होती। पर बारिश के दिनों में तो ईश्वर ही मालिक है। बारिश लगातार होती रही, तो घुटनों तक पानी भर जाता है। पटरियों पर ही लबालब पानी जमने से ट्रेनों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी स्थिति
फिलहाल सामान्य पाइप लाइन व नालियां पानी निकासी के लिए हैं। ऐसे में बारिश में चारों ओर से आनेवाला पानी एक साथ इन पाइपलाइन से नहीं निकल पाता है। पहले से अब दबाव भी ज्यादा रहता है। गत तीन वर्षों में 3-4 बार परिसर जलमग्न हो चुका है। ट्रेनें भी प्रभावित हो चुकी हैं। वर्ष 2015 जुलाई माह में इस तरह की स्थिति देखी गई थी, जब पटरियों पर घुटनों तक पानी भरने से ट्रेनें ठिठक गई थीं।





