आर्थिक संकट के चलते प्रदेश सरकार ने बंद की बालचित्रवाणी

मुंबई.आर्थिक संकट का सामना कर रही पुणे की बालचित्रवाणी संस्था को आखिरकार प्रदेश सरकार ने बंद कर दिया है। प्रदेश सरकार के मुताबिक बालचित्रवाणी संस्था के पास आय का कोई साधन उपलब्ध नहीं है।
– संस्था को कहीं से भी अनुदान नहीं मिल पा रहा था। संस्था के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। इसके मद्देनजर सरकार ने बालचित्रवाणी को बंद करने का फैसला लिया है।
– बुधवार को प्रदेश सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग ने इससे संबंधी शासनादेश जारी किया। शासनादेश के अनुसार बालचित्रवाणी को बंद करके ई-बालभारती संस्था शुरू की जाएगी। सरकार ने बालचित्रवाणी में काम करने वाले कर्मचारियों को 31 मई से सेवा मुक्त करने का आदेश दिया है।
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– साल 1984 से शुरू बालचित्रवाणी को राज्य शिक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान के रूप में जाना जाता था। इसके जरिए शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम बनाए जाते थे। सरकार के मुताबिक बालचित्रवाणी लगभग 6 हजार दृश्य श्रव्य सामग्री बना चुका है।
– इस सामग्री को दूरदर्शन पर जुलाई 2012 तक प्रसारित किया जाता था। लेकिन बाद में दूरदर्शन ने प्रसारण के लिए शुल्क मांगा।
राज्य सरकार ने केंद्र को लिखा था पत्र
– जिसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से निःशुल्क प्रसारण की मांग को लेकर पत्र लिखा था। लेकिन केंद्र इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इस कारण फरवरी 2014 से प्रसारण का काम बंद पड़ गया। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में काफी तकनीकी प्रगति होने के कारण प्रौद्योगिकी शिक्षक आधुनिक तकनीक से अवगत हैं।
– जिसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से निःशुल्क प्रसारण की मांग को लेकर पत्र लिखा था। लेकिन केंद्र इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इस कारण फरवरी 2014 से प्रसारण का काम बंद पड़ गया। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में काफी तकनीकी प्रगति होने के कारण प्रौद्योगिकी शिक्षक आधुनिक तकनीक से अवगत हैं।
– शिक्षकों ने एप के माध्यम से अपने द्वारा बनाए गए वीडियो को अपलोड किया है। मुफ्त में उपलब्ध इस तरह के वीडियो शिक्षकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इससे पहले बीते महीने में पुणे दौरे के समय बालचित्रवाणी के बारे में राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा था कि जो





