‘न मैं लालू जी के दबाव में और न ही भाजपा के करीब, यह सब बकवास’

पटना.जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को अपने मन की बात से सबको चौंकाया। इस राजनीतिक कयास पर तत्काल विराम लगा दिया कि महागठबंधन के घटक खासकर राजद से जदयू का रिश्ता बिगड़ा है और जदयू, भाजपा के करीब जा रहा है। नीतीश ने कहा-मैं न तो लालू प्रसाद के दबाव में काम कर रहा हूं और न भाजपा के साथ जा रहा हूं। मेरे बारे में लोग ऐसे कयास लगाते हैं; ऐसा कहते हैं। यह सब बकवास है। मुख्यमंत्री जदयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ बिहार की राजनीति करुंगा। यहां के विकास के लिए ही काम करता रहूंगा। यही मेरा संकल्प है। बिहार में हम खुद को मजबूत कर रहे हैं। बाहर की राजनीति करने की अभी सोची नहीं है। बोले-सिर्फ नारा लगाने से कोई प्रधानमंत्री नहीं बनता। आगे कहा-आजादी की लड़ाई में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। फिर भी आज देश की गद्दी पर बैठी हुई है। देश की सत्ता की चाबी उसके हाथ में है।
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जवाब देना मुझे आता है पर …
नीतीश ने कहा-रामनाथ कोविंद को समर्थन के बाद हमपर कई आरोप लगे। क्या हमें जवाब देने नहीं आता। पर गठबंधन का ध्यान रख चुप हूं। कोविंद ने चाय पर बुलाया था। यह बात मैंने लालू प्रसाद व अशोक चौधरी को बता दी थी। तब राजभवन गया। मुझे तो 22 जून की विपक्ष की बैठक में जाना था पर गुलाम नबी आजाद ने पटना में इफ्तार में क्या-क्या बोल दिया? तब मैं नहीं गया। आपको जो करना है करिये, मैं सिद्धांत से समझौता नहीं कर सकता। खुशामद करने वाला नहीं हूं। समय पर निर्णय लेता हूं। जो होना होगा, होकर रहेगा। हमारा सिद्धांत एक है। अटल है। काम में विश्वास रखता हूं।
नीतीश ने कहा-रामनाथ कोविंद को समर्थन के बाद हमपर कई आरोप लगे। क्या हमें जवाब देने नहीं आता। पर गठबंधन का ध्यान रख चुप हूं। कोविंद ने चाय पर बुलाया था। यह बात मैंने लालू प्रसाद व अशोक चौधरी को बता दी थी। तब राजभवन गया। मुझे तो 22 जून की विपक्ष की बैठक में जाना था पर गुलाम नबी आजाद ने पटना में इफ्तार में क्या-क्या बोल दिया? तब मैं नहीं गया। आपको जो करना है करिये, मैं सिद्धांत से समझौता नहीं कर सकता। खुशामद करने वाला नहीं हूं। समय पर निर्णय लेता हूं। जो होना होगा, होकर रहेगा। हमारा सिद्धांत एक है। अटल है। काम में विश्वास रखता हूं।
कांग्रेस नेताओं को दी नसीहत
नीतीश ने कांग्रेस के लिए कहा-उसे भिड़ना किससे चाहिए और भिड़ किससे रही है। सिद्धांत मैं नहीं, आप (कांग्रेसी) बदल रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक पर पहले सोनिया ने समर्थन किया, फिर मैंने। जीएसटी के पक्ष में हम यूपीए के समय से हैं। इससे लाभ होगा। यह राज्यहित में है।
नीतीश ने कांग्रेस के लिए कहा-उसे भिड़ना किससे चाहिए और भिड़ किससे रही है। सिद्धांत मैं नहीं, आप (कांग्रेसी) बदल रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक पर पहले सोनिया ने समर्थन किया, फिर मैंने। जीएसटी के पक्ष में हम यूपीए के समय से हैं। इससे लाभ होगा। यह राज्यहित में है।
राजद बुलाएगा तो रैली में जाएंगे ही
नीतीश कुमार ने कहा कि यदि राजद अपनी रैली में बुलाएगा, तो अवश्य जाएंगे। उन्होंने रैली को लेकर जदयू नेताओं को बेवजह बयान देने से परहेज करने की नसीहत दी। कहा कि जदयू नेताओं को एक-दूसरे से उलझने की जरूरत नहीं है। राजद की रैली पर जदयू नेताओं को बोलने की क्या जरूरत थी? जदयू नेता सचेत रहें। ध्यान रहे, काम हम कर रहे हैं और इसका फायदा कोई दूसरा न उठा ले। सबका अपना-अपना कार्यक्रम होता है। राजद की रैली मजबूत होगी। अगर महा गठबंधन की रैली होती, तो कमजोर होती।
नीतीश कुमार ने कहा कि यदि राजद अपनी रैली में बुलाएगा, तो अवश्य जाएंगे। उन्होंने रैली को लेकर जदयू नेताओं को बेवजह बयान देने से परहेज करने की नसीहत दी। कहा कि जदयू नेताओं को एक-दूसरे से उलझने की जरूरत नहीं है। राजद की रैली पर जदयू नेताओं को बोलने की क्या जरूरत थी? जदयू नेता सचेत रहें। ध्यान रहे, काम हम कर रहे हैं और इसका फायदा कोई दूसरा न उठा ले। सबका अपना-अपना कार्यक्रम होता है। राजद की रैली मजबूत होगी। अगर महा गठबंधन की रैली होती, तो कमजोर होती।
राजनीति ही सबकुछ नहीं, आकलन तो सरकार के कामकाज से होता है
नीतीश ने महागठबंधन की नकारात्मक राजनीति को खारिज करते हुए सरकार के कामकाज के लिए नए सिरे से भरपूर स्पेस लिया। बता दिया कि राजनीति ही सबकुछ नहीं है। आकलन, कामकाज से होता है। दरअसल, इधर विपक्ष यह धारणा फैलाने में कामयाब सा रहा है कि प्रदेश की सत्ताधारी जमात, शासन चलाने की बजाए अपनी राजनीति चला रही है। बेशक, महागठबंधन के कारनामों ने ही इसकी गुंजाइश बनाई। चाहे नोटबंदी हो, सर्जिकल स्ट्राइक, राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी या जीएसटी, कमोबेश सभी बड़े मसलों पर तीनों घटक दल, बच्चों की तरह बहाने तलाश कर लड़ते रहे हैं। इन सबका असर सरकार, इसके कामकाज पर भी पड़ा। नीतीश ने जदयू की बैठक में इन स्थितियों को विराम देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपनों को शांत रहने को कहा, तो कांग्रेस को सधे शब्दों में जवाब दिया। राजद की रैली में शामिल होने की बात कहकर, भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय गोलबंदी की समझ को फिर से खुलेआम भी किया। राजद पहले से शांत है। कांग्रेस भी थोड़ा सुगबुगाने के बाद चुप है। खैर, देखने वाली बात होगी कि महागठबंधन की शांति कितने दिनों तक टिकती है?
जदयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश की खास बातें
– मैं किसी का पिछलग्गू नहीं हूं, खुशामद नहीं करता; सिद्धांत से कोई समझौता नहीं।
– बिहार की ही राजनीति करुंगा, समय पर लेता हूं निर्णय।
– मुझे गाली से कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं तो महागठबंधन धर्म का ही पालन कर रहा हूं।
– भाजपा का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं, फिर भी वह आज सत्ता की कुर्सी पर है।
– सत्ता में साझीदार कांग्रेस को दी नसीहत-उसे किससे भिड़ना चाहिए और भिड़ किससे रही है।
– मैंने विपक्षी एकता का प्रयास किया, नहीं हुआ, नतीजा-हार।
– सिर्फ नारा लगाने से ही कोई प्रधानमंत्री नहीं बन जाता।
– गलती से भी कोई जदयू प्रवक्ता लूज टॉक न करें, सब मिलकर विकास के लिए काम करें ।
– बिहार की ही राजनीति करुंगा, समय पर लेता हूं निर्णय।
– मुझे गाली से कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं तो महागठबंधन धर्म का ही पालन कर रहा हूं।
– भाजपा का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं, फिर भी वह आज सत्ता की कुर्सी पर है।
– सत्ता में साझीदार कांग्रेस को दी नसीहत-उसे किससे भिड़ना चाहिए और भिड़ किससे रही है।
– मैंने विपक्षी एकता का प्रयास किया, नहीं हुआ, नतीजा-हार।
– सिर्फ नारा लगाने से ही कोई प्रधानमंत्री नहीं बन जाता।
– गलती से भी कोई जदयू प्रवक्ता लूज टॉक न करें, सब मिलकर विकास के लिए काम करें ।





