टीनएज बच्चा बात-बात पर पलटकर जवाब देता है? डांटने के बजाय बदलें अपना रिस्पॉन्स

टीनएज एक ऐसा दौर होता है, जब शरीर और दिमाग में कई बदलाव होने शुरू होते हैं। इसके कारण बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आता है। चिड़चिड़ा होना या बात-बात पर पलटकर जवाब देना, बहस करना टीनएजर्स में अक्सर ये बदलाव देखने को मिलते हैं।

कई बार पेरेंट्स बच्चों के इस रवैये से परेशान होकर उन्हें डांट देते हैं या सजा दे देते हैं, लेकिन गुस्सा करने से बात और बिगड़ सकती है। आइए जानें बिना गुस्सा किए कैसे आप अपने टीनए बच्चे की इस आदत को सुधार सकते हैं।

कारण को समझें
टीनएज बच्चे जब पलटकर जवाब देते हैं, तो इसके पीछे आपका अनादर करने की मंशा नहीं होती। वो बस अपनी पहचान बनाने, अपनी बात साबित करने और स्वतंत्रता चाहते हैं। इसलिए उनके इस व्यवहार के पीछे का कारण समझने की कोशिश करें। इससे आपको गुस्सा कम आएगा और आप दोनों के बीच का रिश्ता भी सुधरेगा।

तुरंत रिएक्ट न करें
जब बच्चे उल्टा जवाब दें, तो तुरंत गुस्सा करना या डांटना बहुत आम रिएक्शन है। इसकी वजह बात और बढ़ती है, क्योंकि बच्चा भी गुस्से में और उल्टे जवाब देता है। इसलिए तुरंत रिएक्ट न करें। थोड़ा समय रुकें और खुद को शांत करें। इसके बाद शांति से अपनी बात बच्चे को समझाएं।

बच्चे की बात को ध्यान से सुनें
अक्सर माता-पिता बिना पूरी बात सुने ही बच्चे को गलत ठहरा देते हैं। बच्चे को अपनी बात रखने का पूरा मौका दें। कई बार वो बहस इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बात कोई सुन नहीं रहा है। जब वो अपनी बात कर रहे हों, तो बिना टोके उनकी बात को समझने की कोशिश करें और फिर जवाब दें।

बाउंड्री सेट करें
बच्चों को ये समझाना जरूरी है कि अपनी बात रखना एक बात है, लेकिन बदतमीजी करना बिल्कुल एक्सेप्टेबल नहीं है। जब माहौल शांत हो, तब बच्चे के साथ बैठकर कुछ नियम बनाएं। उन्हें समझाएं कि असहमति जताना गलत नहीं है, लेकिन बात करते समय लहजा और सही शब्द चुनना बहुत जरूरी है।

पॉजिटिव व्यवहार की सराहना करें
जब आपका बच्चा बिना बहस किए बात को मान ले या तमीज से अपनी बात रखे, तो उसके इस व्यवहार की सराहना करें। माता-पिता अक्सर बच्चों की गलतियां पकड़ते हैं, लेकिन उनके अच्छे व्यवहार की सराहना करना भूल जाते हैं।

Back to top button