जेटली जी, सैनिटरी नैपकीन हमारी जरूरत है, लग्जरी नहीं, ‘लहू का लगान मत लो’

अभिनेत्रियों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता भी सेनेटरी नैपकीन पर लगने वाले टैक्स का विरोध कर रही हैं. इनका कहना है कि नैपकीन हमारी जरूरत है लग्जरी नहीं इसलिए इसपर लगने वाला टैक्स हटना चाहिए. भारत में काफी ऐसी महिलाएं हैं जो ज्यादा कीमत होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं कर पातीं और बीमारियों का शिकार हो जाती है. ऐसे में इसे जीएसटी के दायरे में न लाया जाए.

इसके विरोध में ज्यादातर अभिनेत्रियों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को टैग करके इसे टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की है. अदिति राव ने ट्वीट किया है कि नैपकीन हमारी जरूरत है लग्जरी नहीं. इसपर टैक्स नहीं वसूला जाना चाहिए.
अपनी बात को बेबाकी से रखने वाली अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा है, सरकार को सैनिटरी नैपकीन पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह हमारी जरूरत है, किसी तरह की विलासिता नहीं.
हालांकि दिल्ली सरकार ने सेनेटरी नैपकीन पर 5 प्रतिशत की टैक्स में छूट दी है लेकिन महिलाओं के स्वास्थ्य के मद्देनजर ये काफी कम है. इसलिए महिलाओं की अपील है कि इसे टैक्स फ्री किया जाना चाहिए.
इंडियन बेडमिंटन प्लेयर ज्वाला गुट्टा ने भी ट्वीट करते हुए लिखा- ‘मिस्टर अरुण जेटली यह बेहद आश्चर्यजनक है। मुझे कभी भी नहीं पता था कि सैनिटरी नैपकीन का इस्तेमाल करना लग्जरी है. मैं हैरान हूं. इसलिए मैं आपसे रिकवेस्ट करती हूं कि सैनिटरी नैपकीन पर टैक्स ना लगाया जाए, ताकि यह हमारे देश की महिलाओं के लिए उपलब्ध हो सके.#लहूकालगान को ना कहिए
बिग बॉस सीजन 9 की कंटेस्टेंट रहीं प्रिया मलिक ने भी सरकार से सवाल किया और मांग भी रखी है कि सेनेटरी पैड्स को टैक्स फ्री कर दिया जाए.
सेनेटरी नैपकीन पर टैक्स वसूलने के विरोध में महिलाओं ने सोशल साइट्स पर जमकर विरोध किया. एक निजी चैनल ने वीडियो के जरिए टैक्स पर व्यंग्य किया. वीडियो में दिखाया गया कि एक महिला ऑफिस में काम करने वाली दूसरी महिला के पास जाकर नैपकीन मांगती है तो वो महिला अपने पर्स से सूखे पत्ते निकाल कर दे देती है और कहती है इसे इस्तेमाल कर लो. और अगर इससे काम न बने तो टॉयलेट पेपर यूज कर लो.
इस तरह से पीरियड से परेशान महिला अन्य कई महिलाओं के पास जाती है और सेनेटरी नैपकीन मांगती है लेकिन कोई इस कपड़ा रखने का सुझाव देता है तो कोई और उपाय समझाता है लेकिन महंगा होने की वजह से नैपकीन कोई नहीं देता है. इसलिए इसे टैक्स फ्री करना बेहद जरूरी है. क्योंकि ये महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है.





