गणेश चतुर्थी: गणपति पूजा में जरूर चढ़ाएं ये 1 खास चीज, लेकिन भूलकर ना करें तुलसी का इस्तेमाल
13 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। इस दिन से अगले 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की विधिवत शुरूआत हो जाएगी। हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश की पूजा जरूर की जाती है क्योंकि उन्हें रिद्धि और सिद्धि का स्वामी माना जाता है और सभी देवताओं में परम पूज्य माने जाते हैं। गणेशजी की पूजा में कई चीजें चढ़ाई जाती है जिसमें दूर्वा का विशेष महत्व होता है। इसके बिना गणेश जी की पूजा अधूरी समझी जाती है। भगवान गणेश को तो दूर्वा काफी प्रिय होती है, लेकिन तुलसी को इनकी पूजा में नही चढ़ाया जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य।

पुराणों के अनुसार एक असुर रहा करता था जिसका नाम अनलासुर था। जो स्वर्ग से लेकर पृथ्वी तक सभी को परेशान करता था। वह ऋषि-मुनियों, देवताओं और आम लोगों को जिंदा ही खा जाया करता था। तब सभी देवता इस राक्षस के पीछा छुडाने के लिए महादेव के पास कैलाश पर्वत जा पहुंचे।
सभी देवी-देवताओं की बात सु्नकर शिवजी ने कहा कि अनलासुर का अंत केवल गणेश ही कर सकते हैं। इसके बाद भगवान गणेश ने अनलासुर को निगल लिया जिसकी वजह से उनके पेट में जलन होने लगी जो शांत ही नहीं हो पा रही थी। तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर गणेश जी को खाने के लिए दी। तब जाकर पेट की जलन शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
गणेश पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार एक बार तुलसी गणेश जी को देखकर उन पर मोहित हो कर उनसे विवाह करने की इच्छा जाहिर की, लेकिन गणेशजी ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इस बात को लेकर तुलसी जी ने उन्हें गुस्से मे दो विवाह करने का श्राप दे दिया ।
तब गणेशजी ने भी तुलसी को श्राप देते हुए कहा कि तुम्हारा विवाह भी एक असुर से होगा। जिसके बाद तुलसी को अपनी गलती का एहसास हुआ और भगवान गणेश जी से माफी मांगी। तब उन्होंने कहा कि तुम कलयुग में मोक्ष देने वाली होगी लेकिन मेरी पूजा में तुम्हे नहीं चढ़ाया जाएगा। फिर तभी से गणेश पूजा में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।





