कोटा मंडल में फिर शुरू हुआ वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल

पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में वंदे भारत ट्रेनसेट (चेयर कार) का ट्रायल कोटा-नागदा रेल खंड पर शुरू हो गया है। इस ट्रेन को पहली बार फ्रांस की अल्सटॉम कंपनी और रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला ने मिलकर तैयार किया है, जिसमें आधुनिक विदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है।
पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में वंदे भारत ट्रेनसेट (चेयर कार) का ट्रायल एक बार फिर शुरू हो गया है। यह ट्रायल कोटा-नागदा रेल खंड पर कोटा-शामगढ़-कोटा रूट में किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस ट्रेन को पहली बार फ्रांस की कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया है, जिसमें आधुनिक विदेशी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।
कोटा-नागदा रूट पर चल रहा ट्रायल
यह ट्रायल कोटा-नागदा रेल खंड के कोटा-शामगढ़-कोटा रूट पर जारी है। ट्रेन की परफॉर्मेंस और सेफ्टी फीचर्स को जांचने के लिए अलग-अलग चरणों में परीक्षण किया जा रहा है।
फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर तैयार हुआ रैक
इस बार वंदे भारत ट्रेनसेट को भारत में पहली बार फ्रांस की अल्सटॉम कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया है। रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला ने इस रैक को बनाया है, जिसमें विदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि ट्रेन की रफ्तार और प्रदर्शन बेहतर हो सके।
आरडीएसओ की निगरानी में हो रही टेस्टिंग
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के अनुसार, यह टेस्टिंग आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन), लखनऊ के निदेशक की निगरानी में की जा रही है। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलेगी।
स्पीड, ब्रेक और सिस्टम की हो रही जांच
ट्रायल के पहले चरण में 60 से 115 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक ट्रेन की पिकअप परफॉर्मेंस, ब्रेकिंग क्षमता और इंटीग्रेटेड सिस्टम की जांच की गई है। ट्रायल का समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक तय किया गया है।
पहले चेन्नई में बनते थे वंदे भारत रैक
अब तक वंदे भारत ट्रेन के रैक चेन्नई की आईसीएफ कंपनी तैयार करती थी। लेकिन इस बार 16 कोच वाला नया वंदे भारत ट्रेनसेट फ्रांस की अल्सटॉम कंपनी और भारत की रेलवे कोच फैक्ट्री कपूरथला के साथ मिलकर तैयार किया गया है।
180 किमी/घंटा की रफ्तार तक होगा ट्रायल
इस नए ट्रेनसेट में यूरोपीय देशों में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक सेफ्टी फीचर्स लगाए गए हैं। आने वाले समय में इस ट्रेन का ट्रायल 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से किया जाएगा, जिससे इसकी अधिकतम क्षमता को परखा जा सके।





