पटना . चंपारण सत्याग्रह के प्रमुख चेहरों में से एक जंदाहा के गया प्रसाद सिंह के प्रयास से ही पंडित जवाहर लाल नेहरू को पेरोल मिली थी। कमला नेहरू उन दिनों गंभीर रूप से बीमार थीं। भुवाल टीबी सेनेटोरियम में भर्ती थीं। सेनेटोरियम उत्तराखंड में है। लार्ड कर्जन के बंग भंग के फैसले के विरोध में बंगाल उबल रहा था। पंडित नेहरू ने सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में 17-18 जनवरी 1934 को तीन सभाएं संबोधित की थीं। हुकूमत की खिलाफत के आरोप में उन्हें 12 फरवरी 1934 को इलाहाबाद से गिरफ्तार किया गया और राजद्रोह के मुकदमे में दो साल की सजा हुई।
– ब्रिटिश सरकार उन्हें पेरोल देने को तैयार नहीं थी। डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने गया बाबू को चिट्ठी लिखी और उनसे पंडित नेहरू को जेल से छुड़वाने का आग्रह किया। गया बाबू केंद्रीय एसेंबली के सदस्य थे। ब्रिटिश सरकार के रवैये का विरोध किया। पैरोल पर छोड़ना पड़ा।
मादक पदार्थों को प्रतिबंधित करने की आवाज उठाई
– शराबबंदी आज भले ही मसला हो, लेकिन गया बाबू ने शराब सहित तमाम मादक वस्तुओं को हिन्दुस्तान में प्रतिबंधित किए जाने की आवाज केंद्रीय एसेंबली में 14 मार्च 1924 को ही उठाई थी।
– कांग्रेस कोष जब्ती और खान अब्दुल गफ्फार खां की गिरफ्तारी पर एसेंबली में उनकी बहस लैण्डमार्क डिबेट की श्रेणी में रखी जाती है।