एक करोड़ शायरी एक दिल के नाम,

1 मेरी शायरियोँ से तंग आ जाओ,
तो बता देना मुझे,
वैसे भी मुझे नफरत पसन्द है,
मगर दिखावे का प्यार नही..!!डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो…..
2और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया…..इन्कार किया जिन्होंने मेरा समय देखकर…वादा है मेरा ऐसा समय भी लाऊंगा कि मिलना पड़ेगा मुझसे समय लेकर !!
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