इंडोनेशिया के इस प्राचीन मंदिर की दीवारें सुनाती हैं रामायण

इंडोनेशिया एक मुस्लिम आबादी वाला देश है लेकिन इस देश में स्थित आज से करीब 1000 साल पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत के साथ एक खास कनेक्शन को दिखाता है। इन दिनों यह मंदिर इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि भारत इस मंदिर का जीर्णोद्धार करने जा रहा है, ऐसे हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर इंडोनेशिया में यह मंदिर बना कैसे और क्यों यह भारत के साथ एक खास ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ता रखता है।

प्रम्बानन मंदिर का इतिहास
इंडोनेशिया का प्रम्बानन मंदिर हिन्दू धर्म के लिए बेहद खास है क्योंकि इस मंदिर में तीनों देवों की पूजा होती है, ब्रह्मा, विष्णु और महेश। एक दिशा में भगवान शिव विराजमान हैं, दक्षिण दिशा में भगवान विष्णु हैं तो उत्तर दिशा में ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है।

इस मंदिर की स्थापना आज से करीब 1000 साल पहले 9वीं शताब्दी में संजया वंश के राजा राकाई पिकाटन ने करवाई थी। बताते चलें कि इस मंदिर को इंडोनेशिया में रोरो जोंगग्रंग के नाम से जाना जाता है, इसका हिन्दी में मतलब समझें तो इसे ‘पतली कुंवारी का मंदिर’ कहा जाएगा।

वहीं, इस मंदिर की लोकेशन की बात करें तो यह इंडोनेशिया के मध्य जावा में जोगजकार्ता शहर से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर की बनावट पल्लव चोल शैली से इंसपायर बताई जाती है, जिसमें सबसे ऊंचा शिखर है, बड़ा सा प्रांगण है और वास्तु शास्त्र की मण्डल अवधारणा को भी ध्यान में रखा गया है।

पत्थरों पर रामायण की कहानी
प्रम्बानन मंदिर केवल अपने वास्तु शास्त्र के लिए ही पूरी दुनिया में फेमस नहीं माना जाता। इसका भारत से सांस्कृतिक जुड़ाव भी है क्योंकि यहां मंदिर की दीवारों और प्रांगण में रामायण महाकाव्य की कहानियों को बड़ी ही बारीकी से उकेरा गया है। इन्हें देखकर रामायण की कहानी को आसानी से समझा जा सकता है।

रामायण बैले
सबसे खास बात कि मंदिर की दीवारों पर उकेरी गईं रामायण की कहानी को जीवंत बनाने के लिए मंदिर के पास ही ओपेरा शैली में रामायण बैले नामक नाटक का भी आयोजन किया जाता है। हर साल मई से अक्टूबर के महीने में आयोजित होने वाले इस नाटक में राम, सीता और रावण की कथा मंचों पर दिखाई जाती है और इसे देखने के लिए दुनियाभर से टूरिस्ट आते हैं।

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