UP सरकार गर्भवती महिलाओं को देगी Rs.5000 का अनुदान, ऐसे उठाये लाभ, करें आवेदन…
लखनऊ. प्रदेश के सभी डिस्ट्रिक्ट में गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए भारत सरकार की तरफ से ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ का लाभ दिया जा रहा है। यह लाभ 3 चरणों में नगद धनराशि के रुप में सीधे उनके खाते में ट्रांसफर किया जाता है। प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा और स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी के मुताबिक़ डिस्ट्रिक्ट में इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी सीएमओ की होगी। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) को इसके लिए जिले में नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

क्या है प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
– केंद्र सरकार की तरफ से देश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना'(पीएमवीवाई) संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत हर घरेलू महिला को पहले बच्चे के जन्म पर 5 हजार रुपए अनुदान मिलता है।
– यह अनुदान गर्भधारण से बच्चे के जन्म के बाद पहले टीकाकरण तक 3 किश्तों में दिया जाता है। महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की कमी दूर करने के लिए केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना'(पीएमवीवाई) के तहत यह सहायता दी जाती है।
– यूपी सरकार ने भी एक शासनादेश जारी कर इस योजना को प्रदेश भर में लागू कर दिया है।
ऐसे मिलेगा लाभ
– इस योजना का लाभ पाने के लिए प्रेग्नेंट वुमेन को सबसे पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आशा/एएनएम के पास जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
– रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद उसे 1000 रुपए की पहली किश्त मिल जाएगी। दूसरी किश्त 2000 रुपए की होगी जो गर्भावस्था के 6 महीने बाद प्रसव से पहले एक जांच कराने के बाद मिलेगी।
– तीसरी किश्त भी 2000 रुपए की होगी जो नवजात शिशु के रजिस्ट्रेशन और जन्म के एक महीने बाद पहला टीकाकरण कराने पर मिलेगी।
सरकारी नौकरीपेशा को लाभ नहीं
– योजना के लिए रजिस्ट्रेान फॉर्म आशा/एएनएम और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर मिलेगा। इसके अलावा भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट wcd.nic.in और sifpsa.org से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
– सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। योजना पर निगरानी के लिए ग्राम स्तर से जिला और राज्य स्तर तक कमिटियां बनाई गई हैं।
– 1 जनवरी 2017 के बाद गर्भवती महिलाएं इस योजना में रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं।
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जननी सुरक्षा योजना भी लागू रहेगी
– एनएचएम के तहत जननी सुरक्षा योजना पहले से लागू है। इसमें संस्थागत (सरकारी स्वास्थ्य केंद्र) प्रसव पर ग्रामीण क्षेत्र में 1400 और शहरी क्षेत्र में 1000 रुपए सहायता दी जाती है।
– पीएमवीवाई योजना उससे अलग होगी। इसका मकसद कुपोषण को दूर करना है। सामान्य तौर पर गर्भधारण के दौरान ठीक से पोषण न मिलने के कारण गर्भस्थ शिशु भी कुपोषित हो जाता है।
– इससे कई बार गर्भावस्था में ही शिशु की मृत्यु हो जाती है। बच्चा पैदा होता भी है तो वह कुपोषित रहता है और बाद में उसके जीवन का संकट बना रहता है। वहीं, जीविका के लिए महिलाएं गर्भावस्था में भी काम करती रहती हैं और जन्म के बाद भी तुरंत कामकाज में जुट जाती हैं।
– इस योजना का मकसद महिलाओं को पोषक तत्व लेने और गर्भावस्था में कामकाज से निजात दिलाना है।





