UP के महराजगंज का ‘महाराज’ बनने के लिए छठी बार फिर सांसद बनने के लिए रेस में BJP…

Loading...

पूर्वी उत्तर प्रदेश का महराजगंज संसदीय क्षेत्र देश के बेहद पिछड़े इलाकों में आता है. इस सीट पर पिछले कई बार से बीजेपी का कब्जा है. हालांकि इस सीट पर अक्सर त्रिकोणीय लड़ाई रही है और इस बार भी तीन मजबूत कैंडिडेट दम ठोक रहे हैं. बीजेपी के पंकज चौधरी यहां से पांच बार सांसद रह चुके हैं और छठी बार भी सांसद बनने के लिए रेस में हैं.

पंकज चौधरी को पीएम मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों के दम पर फिर जीत का पूरा भरोसा है, तो दूसरी तरफ महागठबंधन के उम्मीदवार अखिलेश सिंह सपा-बसपा के वोट बैंक और अपनी लोकप्रियता के दम पर अपनी जीत पक्की मान रहे हैं. तीसरी प्रमुख कैंडिडेट हैं कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत, जिनको अपने पिता की विरासत और कांग्रेस के वोटबैंक पर भरोसा है. मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है कि जिले की राजनीति में प्रभावी भूमिका रहने वाला अमरमणि त्रिपाठी का परिवार कांग्रेस कैंडिडेट के साथ दिख रहा है.

राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव

किसानों, खासकर गन्ना किसानों की बदहाली, आवारा पशुओं की समस्या, जिला मुख्यालय तक रेलमार्ग न होना, गरीबी, युवाओं में रोजगार का अभाव इस इलाके की प्रमुख समस्याएं हैं. लेकिन एक कटु सत्य यह भी है कि इस संसदीय क्षेत्र पर चुनाव स्थानीय मसलों पर नहीं होता है. 90 के बाद 7 बार यहां पर लोकसभा चुनाव हुए जिसमें 5 बार बीजेपी ने जीत हासिल की. हिंदुत्व, राष्ट्रवाद जैसे मसलों पर चुनाव होने का लाभ बीजेपी कैंडिडेट को मिलता रहा है. इस बार भी उन्हें पीएम मोदी और उनके विकास कार्य के बल पर नैया पार होने की उम्मीद है.

2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा गया जिसमें बीजेपी को उत्तर प्रदेश में बंपर कामयाबी मिली थी. मुख्य मुकाबला बीजेपी के पंकज चौधरी और बसपा के काशीनाथ शुक्ला के बीच रहा. यहां पर सामान्य वर्ग की 81 फीसदी आबादी रहती है तो 18 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति और 1 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है. धर्म के आधार पर देखा जाए तो यहां पर 81.8 फीसदी आबादी हिंदुओं की है, जबकि 17.1 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है.

महराजगंज संसदीय सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र (फरेंदा, नौतनवां, सिसवां, महराजगंज और पनियरा) आते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम देखें तो इन 5 विधानसभा सीटों में से 4 में बीजेपी का कब्जा है, जबकि एक पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है.

वर्तमान सांसद पंकज चौधरी को इस बार भी अपनी जीत का पूरा भरोसा है. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैंने इस क्षेत्र में जो विकास के काम किए हैं और पीएम मोदी ने देश में जिस तरह से सबका साथ- सबका विकास का नारा देकर विकास का काम किया है, उसकी वजह से मुझे अपनी जीत का भरोसा है.’

महागठबंधन से सपा के अख‍िलेश को मिला है टिकट

दूसरी तरफ, महागठबंधन के उम्मीदवार सपा नेता कुंवर अखि‍लेश सिंह सिंह कहते हैं कि पांच बार सांसद रहे पंकज चौधरी ने इस इलाके में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया है. वह सपा-बसपा के सॉलिड वोटबैंक और सपा के वायदों के दम पर चुनाव जीतने का भरोसा रखते हैं. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘पंकज चौधरी पांच बार सांसद रहे, लेकिन उन्होंने काम क्या किया, आप स्वयं यहां की जनता से पूछ लीजिए. वह यहां के जिला मुख्यालय को आज तक रेल मार्ग से नहीं जोड़ पाए. सड़कों का बुरा हाल है.’

सपा नेता अखिलेश सिंह जिले के लक्ष्मीपुर (अब नौतनवां) विधानसभा से दो बार विधायक और महाराजगंज से 1999 में सपा के टिकट पर जीतकर सांसद भी रह चुके हैं. साल 2014 के चुनाव में वह 2.13 लाख वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे.

दिलचस्प है लड़ाई

पूर्वांचल के वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव कहते हैं, ‘अभी जो समीकरण दिख रहे हैं उसमें बीजेपी प्रत्याशी पंकज चौधरी का पलड़ा भारी दिख रहा है. यह सच है कि इस इलाके में विकास आपको कुछ खास नहीं दिखेगा, लेकिन वोटों के समीकरण की वजह से उन्हें अपनी जीत का भरोसा है. असल में कांग्रेस ने इस बार मजबूत प्रत्याशी उतारा है और उनको जितने वोट मिलेंगे वह एक तरह से महागठबंधन प्रत्याशी के खाते में कटौती जैसी होगी. मुस्लिम वोटों के बंटने का भी महागठबंधन को नुकसान हो सकता है. इसके अलावा पंकज चौधरी का अपना कई लाख का चौधरी वोट बैंक भी है. महागठबंधन प्रत्याशी का देर से मैदान में आना भी उनके पक्ष में गया है और उनके पक्ष में एक और बात यह रही कि अमरमणि त्रिपाठी की बेटी चुनाव मैदान से बाहर हो गई हैं.’

जानकार तो यह भी कह रहे हैं कि अमरमणि के परिवार का कांग्रेस के समर्थन में खड़ा होना भी एक तरह से पंकज चौधरी को फायदा पहुंचाएगा, क्योंकि कांग्रेस कैंडिडेट का जितना ही वोट बढ़ेगा, बीजेपी को उतना ही फायदा होगा.

कांग्रेस से टीवी पत्रकार मैदान में

कांग्रेस कैंडिडेट सुप्रिया श्रीनेत यहां के पूर्व सांसद हर्षवर्धन सिंह की बेटी हैं. वह दिल्ली में एक बिजनेस चैनल में संपादक रही हैं और पत्रकारिता छोड़कर अपने पिता के विरासत को आगे बढ़ाते हुए राजनीति में उतर आई हैं. पिता की तरह उनकी भी छवि एक जुझारू कैंडिडेट की बन रही है. उनको अपने पिता के नाम और काम तथा युवा वोटर्स पर काफी भरोसा है. आजतक से बातचीत में सुप्रिया ने कहा, ‘यह इलाका काफी पिछड़ा है और यहां मौजूदा सांसद ने कोई विकास नहीं किया है. यहां पर गन्ना किसान परेशान हैं और नौजवानों के लिए रोजगार का कोई साधन नहीं है. अपने पिता की तरह लड़ाई लड़ते हुए बंद पड़ी चीनी मिलों को शुरू कराऊंगी. फरेंदा से महराजगंज-घुघली को रेल मार्ग से जोड़ना और यहां उद्योग-धंधों की शुरुआत कराना भी मेरी प्राथमिकता होगी.’

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि महराजगंज संसदीय सीट में बीजेपी कैंडिडेट मजबूत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन महागठबंधन और कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवारों की वजह से लड़ाई इतनी आसान नहीं है.

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com