इस पत्र के स्थानीय मीडिया में लीक हो जाने को उमा ने अपने खिलाफ साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा है कि यह सब उनके कार्यक्रम को खराब करने के लिए किया गया है. उमा ने इस मुद्दे पर एक बाद एक छह ट्वीट किए हैं. उमा ने एक ट्वीट में कहा, “हमारे प्रधानमंत्री तथा केंद्र सरकार के इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम को खराब करने की कुचेष्टा के तहत मार्च के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे गए मेरे एक पत्र को एक समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया है और एक टीवी चैनल में दिखाया जा रहा है.”

उन्होंने लिखा, “कमाल यह है कि पत्र लिखने का दिन और महीना खबर से गायब कर दिया गया है, और पत्र के अलग-अलग वाक्यों को जोड़कर एक समाचार बना दिया गया है. इससे पत्र के असली तथ्य ही गायब हो गए हैं और इस तथ्य पर तो अदालत ने भी अपनी राय दे दी है. इसलिए पत्र तथा उसका प्रसंग आज के संदर्भ में अपना अस्तित्व खो चुके हैं. किंतु, महत्वपूर्ण बात यह है कि आज का दिन इसके लिए क्यों चुना गया? यह हमारे केंद्र सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास है तथा हमारे प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण उपलब्धि से ध्यान हटाने का प्रयास है.”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “कार्यक्रम की गरिमा एवं महत्व को कम करने के लिए किसी दूसरे संदर्भहीन हो गए विषय को उठाने के इस अनैतिक प्रयास की मैं निंदा करती हूं. मेरी मीडिया के सभी वगोर्ं से अपील है कि आज इस घोर अनैतिक चेष्टा की अनदेखी कीजिए. मैं कल भोपाल में हूं, इस विषय पर कल बात करूंगी.” उमा ने जो पत्र लिखा था, उसमें मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारी एस. के. मिश्रा से हुई बातचीत का भी जिक्र है. इस पत्र के सामने आने के बाद सियासी गलियारे में चर्चा का दौर जारी है.