UK में अधिकारियों के सम्मेलन में संसदीय कार्यप्रणाली में सुधारों पर होगा मंथन, नवंबर में लगेगी मुहर

उत्तराखंड संसदीय कार्यप्रणाली में सुधारों का गवाह बनने जा रहा है। देहरादून में आगामी नवंबर माह में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में संसदीय कार्यप्रणाली में जरूरी सुधारों पर मंथन होगा। संसदीय कार्य संचालन नियमावली में सुधारों के लिए लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट इस सम्मेलन में प्रस्तुत की जाएगी। समितियों की संस्तुतियों पर चर्चा के बाद इन पर देहरादून सम्मेलन में मुहर लगाई जाएगी। 
देहरादून में आगामी नवंबर में देश के सभी राज्यों की विधानसभा व विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में लोकसभा व राज्यसभा के अलावा राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, जिन राज्यों में विधान परिषद हैं, उनके सभापति व उपसभापति के साथ ही विधानसभा सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारी शिरकत करेंगे।
प्रारंभिक तौर पर सम्मेलन के लिए 11 से 15 नवंबर तक समय तय किया गया है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदन की कार्यवाही का बगैर व्यवधान सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के उपायों पर मंथन करना है। यह सम्मेलन इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इसके जरिये भविष्य में सदन की कार्यवाही के संचालन के नियमों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
मसलन, छत्तीसगढ़ की तर्ज पर सभी राज्यों की विधानसभाओं में सदन में वेल में आकर हंगामा करने पर स्वत: निलंबन के प्रावधान पर सहमति बन जाए तो इस परिपाटी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। विधानसभाओं को वित्तीय रूप से स्वायत्त बनाने के उपाय, विकास कार्यो में भूमिका, सदस्यों के आचरण को लेकर नियमावली बनाना भी इस कार्यक्रम के एजेंडे में शामिल है।
विधानसभा व विधान परिषदों को ई गवर्नेस से जोड़कर पेपरलैस सिस्टम का विकास भी मंथन का हिस्सा होगा। सम्मेलन में जिन बिंदुओं पर सहमति बनेगी, उन्हें फिर क्रियान्यवन के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सम्मेलन के मुख्य बिंदु
-सदन की कार्यवाही में व्यवधान को किस तरह न्यूनतम या खत्म किया जाए। -विधानसभाओं की वित्तीय स्वयत्तता की स्थिति।
-सदस्यों के आचरण के संबंध में कोड ऑफ कंडक्ट पर चर्चा।
-संसदीय संस्थाओं के चारों जोन के मध्य आपसी समन्वय पर मंथन।
-पेपरलेस ई विधानसभा की अवधारणा का क्रियान्वयन।
-सभी राज्य स्वयं के लिहाज से महत्वपूर्ण एक-एक विषय पर प्रस्तुतीकरण भी देंगे।
राज्य के लिए गौरव की बात
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में संसदीय कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में निश्चित रूप से कुछ न कुछ निकल कर आएगा। उत्तराखंड में पहली बार इस तरह का व्यापक और कई लिहाज से महत्वपूर्ण आयोजन हो रहा है, यह राज्य के लिए गौरव की बात है।
विस अध्यक्ष ने सम्मेलन की मुख्यमंत्री को दी जानकारी
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भेंट कर नवंबर में देहरादून में होने वाले पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के संबंध में चर्चा की। विस अध्यक्ष ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों की बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन को देहरादून में आयोजित करने के संबंध में अनुमति प्रदान कर दी है।
अखिल भारतीय स्तर पर संसदीय प्रक्रिया में एकरूपता एवं उनके उच्च स्तरीय मानकों की स्थापना के लिए के सभी पीठासीन अधिकारियों का हर साल सम्मेलन आयोजित किया जाता है। इसमें लोकसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, देश भर की विधानसभाओं के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा विधान परिषदों एवं राज्यसभा के सभापति व उपसभापति हिस्सा लेते हैं।
इस आयोजन पर मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि पहली बार पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन छोटे से राज्य उत्तराखंड में आयोजित किया जा रहा है, जो सभी उत्तराखंड वासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सरकार एवं शासन का पूर्ण सहयोग रहेगा।





