ये है पुरुष की मर्दानगी का असल राज, इस तरह से रखें अपने शरीर का ख्याल…

मनुष्य के शरीर में 3 क्रियाशील केंद्र हैं उनका परस्पर संबंध में एक कोई भी विषैला प्रभाव होने से दूसरे पर वैसा ही होता है. रक्त के दबाव के आधार पर मूत्र का बनना कम या अधिक होता है. आचार्य चतुरसेन ने अपनी एक पुस्तक में बताया है कि स्वस्थ शरीर के बिना व्यक्ति यौन संबंध के सुख से वंचित रह जाता है…

ज्यों-ज्यों आयु बढ़ती जाती है स्वाभाविक रूप से हमें अपनी अंगों की सफ़ाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए यदि आयु की वृद्धि के साथ क़ब्ज़ न बढ़े तो रक्त, वीर्य और मूत्र तीनों शुद्ध और निरोग रहेंगे. यदि कुछ काल तक क़ब्ज़ रहने लगेगा तो निश्चय ही रक्त अशुद्ध होने लगेगा.
क़ब्ज़ कैसे दूर किया जा सकता है इससे हमें निश्चित जान लेना चाहिए. क़ब्ज़ को दूर करने के लिए हमें आंतों के दुश्मनों को जानना चाहिए जो रहन-सहन की भूलों के कारण हमसे हो जाती हैं. क़ब्ज़ से हमें सिर्फ़ रक्त की अशुद्धि ही नहीं भोगनी पड़ती बल्कि हमारी पाचन शक्ति भी कम हो जाती है. पीठ की ओर जो बहुत सी मांसपेशियां हैं वह चिर काल तक निश्चेष्ट रहती है. परंतु यदि ये मांसपेशियां ठीक से अपना कार्य करें तो हम क़ब्ज़ की कठिनाई से बच सकते हैं. काम के लिए भलीभांति व्यायाम करना आवश्यक है.





