जीवन को मंगलमय बनाए रखने के लिए सावन में करें शिव पुराण का पाठ

सावन के महीने में देशभर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है। पंचांग के अनुसार, इस बार सावन की शुरुआत 22 जुलाई से हुई है, जिसका समापन 19 अगस्त को होगा। इस पूरे महीने में महादेव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और फल, मिठाई और खीर समेत आदि चीजों का भोग लगाया जाता है। साथ ही विधिपूर्वक शिव पुराण का पाठ जरूर करना चाहिए। धार्मिक मत है कि इससे जातक को जीवन के सभी दुख और दर्द से मुक्ति मिलती है। शिव पुराण की कथा के पाठ के दौरान नियमों का पालन करना अधिक आवश्यक होता है। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है और महादेव प्रसन्न होते हैं।
शिव पुराण के नियम (Shiv Puran Ke Niyam)
शिव पुराण कथा की शुरुआत शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए।
शिव पुराण का पाठ करने से पहले साधक को स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए।
ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए।
किसी इंसान के प्रति मन में गलत विचार धारण नहीं करने चाहिए।
पाठ को विधिपूर्वक और सच्चे मन से करना चाहिए।
शिव पुराण की कथा का पाठ करने के लिए किसी उत्तम जगह पर मंडप बनाना चाहिए और चारों तरफ महादेव का ध्वज लगाएं। साथ ही फूलों से सजाएं।
शिव पुराण की कथा पूरी होने के बाद श्रद्धा अनुसार धन, अन्न और वस्त्र समेत आदि चीजों का दान गरीब लोगों में करना चाहिए।
शिव पुराण के फायदे ( Shiv Puran Path Katha Benefits)
सनातन धर्म में महत्वपूर्ण पुराणों में से एक शिव पुराण भी शामिल है। इसमें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से शिव पुराण का पाठ करने से जातक पर सदैव महादेव की कृपा बनी रहती है। शिव पुराण में भगवान शिव की लीलाओं और कथाओं का वर्णन देखने को मिलता है। इसका पाठ करने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।शिव पुराण के पाठ से संतान की प्राप्ति होती है और सभी तरह के रोग दूर होते हैं। इसके अलावा साधक को शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है। साथ ही सभी पाप दूर होते हैं और जीवन मंगलमय होता है।





