संतों को साध कुंभ का एक मोर्चा जीत गए सीएम योगी
इलाहाबाद : कुंभ हो या फिर माघ मेला। संतों और प्रशासन के बीच भूमि और सुविधाओं के आवंटन को लेकर तकरार होना लगभग तय रहता है। संतों की जरूरत को गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ बखूबी जानते हैं। अब मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें अफसरों की मुश्किलों का भी भान है। इसलिए उन्होंने कुंभ से पहले ही किसी विवाद की आशंका को निर्मूल करने की तैयारी की। दो दिवसीय दौरे में संतों से मेल मुलाकात और उनकी मांगों को तवज्जो देने का यही निहितार्थ निकाला जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने शुरू से ही अफसरों को संतों को दी जाने वाली सुविधाओं के प्रति सचेत कर दिया था। फिर भी अखाड़ा परिषद रह-रह कर नाराजगी जता रहा था। सीएम के आगमन से पहले अखाड़ा परिषद ने आपात बैठक कर अपनी मांगों को लेकर कड़े तेवर भी अख्तियार कर लिए थे, लेकिन सीएम के शनिवार को इलाहाबाद पहुंचते ही नजारा बदल गया। सीएम ने आते ही संतों के साथ होने के संकेत दे दिए। इसलिए शाम को दो घंटे चली मार्गदर्शक मंडल की बैठक में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से लेकर किसी संत ने कोई विरोध प्रकट नहीं किया।
इसके बाद जब उन्हें स्वामी वासुदेवानंद की नाराजगी की खबर मिली तो वे बिना किसी कार्यक्रम के अलोपीबाग स्थित उनके आश्रम पहुंच गए। वहां आधे घंटे की वार्ता के बाद जब वे निकले तो चेहरे पर सफल मुस्कान थी। रविवार को तो उन्होंने सबसे पहले नगर देवता वेणीमाधव के दर्शन किए। फिर स्वामी प्रभुदत्त ब्रहमचारी के आश्रम, सच्चा बाबा आश्रम होते हुए बाघंबरी गद्दी मठ पहुंचे। जहां उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से विशेष वार्ता कर सारे गिले शिकवे दूर कर दिए।
उन्होंने यह कहकर कि ‘अखाड़ों को असुविधा हुई तो अफसर नाप दिए जाएंगे। अफसरों से लेकर संतों को एहसास कराया कि सूबे की सत्ता में सबसे ऊंची कुर्सी पर इस वक्त एक संत विराजमान है। साथ ही संतों को भरोसा दिलाया कि कुंभ उनका है, देश के करोड़ों लोगों का है। इसलिए इसे विवाद से दूर रखने और सकुशल सफल बनाने की जिम्मेदारी भी उनकी है।





