बिहार में मानसून सत्र का हुआ आगाज, इन मुद्दों पर हो सकती है बात

पटना। बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र शुक्रवार को शुरू हो गया है। मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की है। इस दौरान महागठबंधन के विधायकों ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। इसके पहले राजद के भाई वीरेंद्र ने कहा कि कानून व्‍यवस्‍था का मुद्दा सबसे बड़ा है। विरोध के और भी कई मुद्दे हैं। विपक्ष ने सरकार पर सूखे की आशंका को लेकर समय रहते तैयारी नहीं करने का आरोप लगाया है। विपक्ष राज्‍य को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग रखेगा। विपक्ष नीतीश कुमार की सरकार को शराबबंदी कानून में संशोधन के बहाने भी घेरेगा।बिहार में मानसून सत्र का हुआ आगाज, इन मुद्दों पर हो सकती है बात

इन मुद्दों पर रहेगी नजर 

मानसून सत्र पर लोगों की निगाहें शराबबंदी और दहेज विरोधी कानून में किए जा रहे संशोधन पर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार जहां शराबबंदी कानून के प्रावधानों में कुछ रियायत देने जा रही है वहीं दहेज प्रथा को जड़ मूल से समाप्त करने के लिए पुराने कानून को और कठोर करने जा रही है। इस संक्षिप्त सत्र के दौरान विपक्ष राज्य में कानून व्यवस्था और प्रदेश में सूखे की स्थिति पर सरकार को घेरने की हरसंभव कोशिश करेगा।

सत्र में लाए जा रहे चार विधेयक 

विधानमंडल के मानसून सत्र में चार विधेयक लाए जा रहे हैं। 23 और 24 जुलाई को सदन में इसके लिए समय निर्धारित है। सबसे अधिक चर्चा बिहार मद्य निषेध और उत्पाद संशोधन विधेयक 2018 को लेकर है। पूर्व के शराबबंदी कानून में जिस परिसर या वाहन से शराब की बरामदगी होती थी उसे जब्त करने का प्रावधान था। सरकार नए कानून में परिसर को नये सिरे से परिभाषित किया जा रहा है। साथ ही मकान जब्त करने के प्रावधान को समाप्त किया जा रहा है। दंड के प्रावधान को भी नरम करने के संकेत हैं। प्रथम अपराध में पांच वर्ष की सजा और एक लाख रूपये का जुर्माना और द्वितीय अपराध की स्थिति में दस वर्ष की सजा और पांच लाख रुपये तक के जुर्माना का प्रावधान किया जा रहा है।  

दहेज जैसी सामाजिक बुराई को जड़ मूल से समाप्त करने के उद्देश्य से दहेज प्रतिषेध बिहार संशोधन निरसन विधेयक 2018 लाया जा रहा है। देश में दहेज के खिलाफ 1975 में कानून बना था। इस केंद्रीय कानून के अनुरूप बिहार में भी एक कानून बना था। इस कानून के बावजूद बिहार में दहेज प्रथा बढ़ रही है। समाज कल्याण विभाग पुराने कानून को वापस लेकर नया कानून पेश करने जा रही है। जिसमें दहेज लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया जा रहा है।

राज्य सरकार बिहार तकनीकी कर्मचारी चयन आयोग संशोधन विधेयक 2018 भी ला रही है। 2014 में वर्ग 3 और वर्ग 4 के तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए यह आयोग गठित किया गया था। वेटनरी डाक्टर जैसे पदों पर नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग से होती थी। नए कानून से बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार तकनीकी सेवा आयोग बन जाएगा और यह तकनीकी सेवा के राजपत्रित और अराजपत्रित दोनों श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकेगा। जीएसटी लागू होने के बाद उत्पाद आयुक्त जैसे पदों के नामकरण में संशोधन के लिए बिहार वित्त विधेयक 2018 लाया जा रहा है।

विधानमंडल के इस सत्र में विपक्ष राज्य में कानून व्यवस्था की खराब होती जा स्थिति पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। राज्य में सुखाड़ से मचे हाहाकार और किसानों की बदहाली तथा डीजल सब्सिडी में धांधली पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने और एडमिशन की समस्या को लेकर भी विपक्ष का तेवर गर्म रहने की संभावना है।

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