बकरीद के दिन बकरे की कुर्बानी देने के पीछे ये है रहस्यमय, जानकर चौक जाएगे आप

हमारे देश में हर धर्म को बहुत एहमियत दी जाती है। सभी धर्मों के त्यौहारों को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। सभी लोग किसी भी धर्म के पर्वों और दिनों को बड़े हर्षोल्लास और ख़ुशी से मनाते है। आज ईद पुरे देश में बड़े उल्लास से मनाई जाएगी। आज के दिन सभी देशवासी मस्जिद में जाकर खुदा से अपनी खुशियों की कामना करते है। आज बकरीद है। इसे कुर्बानी का पर्व कहा गया है। बकरीद के दिन अपनी किसी प्रिय चीज की अल्लाह के लिए कुर्बानी देनी होती है। बकरीद का त्यौहार सिर्फ बकरो की कुर्बानी देने का नाम नहीं है बल्कि कुर्बानी का मकसद है अल्लाह को राजी करने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज को भी त्याग कर देना है। 

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कुरान-ए-पाक में इस बात का जिक्र है कि अल्लाह तआला ने हजरत इब्राहिम को ख्वाब में दिखाया कि तुम्हारे पास जो सबसे प्यारी चीज हो उसे कुर्बान कर दो। अल्लाह के इस फरमान को देख उन्होंने अपने पुत्र हजरत इस्माइल को कुर्बान करने की तैयारी कर ली। जब हजरत इस्माइल को इसका पता चला तो वह फौरन कुर्बान होने के लिए तैयार हो गए। इस्माइल ने कहा कि अब्बू आप कुर्बानी करते वक्त अपनी आंखों पर पट्टी बांध लेना, ताकि छुरी चलाते वक्त आपके  हाथ न कांपे। जैसे ही इब्राहीम अलैही सलाम अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर छुरी से अपने बेटे को कुर्बान करने लगे, वैसे ही अल्लाह ने फरिश्तों के सरदार जिब्रील अमीन को जमीन पर भेजकर इस्माईल को छुरी के नीचे से हटाकर उनकी जगह एक मेमने को रख दिया। इस तरह इब्राहीम अलैही सलाम के हाथों मेमना कुर्बान हो गया। 

आज ईद के दिन आप अपने सखे-संबंधियों को व्हॉट्सऐप और फेसबुक मैसेज के ज़रिये बकरीद की ये कहानी भेजे और ईद मुबारक कह सकते हैं।

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मुबारक नाम है तेरा, मुबारक ईद हो तुम्हें,

जिसे तूम देखना चाहे, उसी के दीदार हो तुम्हें,

ईद मुबारक!!

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