आज स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए एम्स ऋषिकेश में रखा गया है। एम्स में स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए रखने को लेकर समर्थक अड़ गए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देहरादून से लेकर हरिद्वार तक फोर्स तैनात की गई है। एसपी ग्रामीण देहरादून एम्स में पहुंच चुकी हैं। एसएसपी के भी हुंचने की उम्मीद है।
गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का गुरुवार दोपहर बाद एम्स ऋषिकेश में निधन हो गया। गुरुवार को एम्स ऋषिकेश में स्वामी सानंद के देहावसान के बाद एम्स निदेशक डॉ. रविकांत ने प्रेसवार्ता आयोजित की। उन्होंने बताया कि प्रो. जीडी अग्रवाल की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई। वह छह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।
इनमें ब्लड प्रेशर, लांग टाइम हाइपर टेंशन, कॉर्नरी आर्टरी डिजीज, आर्टरी वाल्ब डिजीज, हार्निया, यूरिन किटोंस डिजीज शामिल थीं। उक्त बीमारियों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को एक भी बीमारी पूरी तरह जकड़ ले तो मौत का माध्यम बन जाती है।
‘वह कई बीमारियों की जकड़ में थे’
डॉ. रविकांत ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह स्वामी सानंद से बात भी हुई थी। वे संतुष्ट नजर आ रहे थे। उनकी आयु 80 वर्ष हो चुकी थी, लिहाजा वह कई बीमारियों की जकड़ में थे।
उन्होंने बताया कि स्वामी सानंद का उपचार डॉ. वेंकटेश पाई की देखरेख में चल रहा था। काफी प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अपराह्न करीब 1:50 मिनट पर प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ सानंद स्वामी ने आखिरी सांस ली और 2 बजे मृत घोषित कर दिया गया।
एम्स निदेशक के मुताबिक स्वामी सानंद का पोटैशियम और ग्लूकोज लेवल काफी असंतुलित हो चुका था। खाना पीना छोड़ चुके स्वामी सानंद के शरीर में खून का संचार लगभग बंद हो गया था। वे पूर्व में 12 जुलाई, 13 अगस्त और इस बार 10 अक्तूबर को एम्स में भर्ती हुए थे। उन्हें पूर्व में भी एंजियोग्राफी और सर्जरी कराने की सलाह दी गई थी लेकिन वो नहीं माने थे।
उनकी निधन की खबर आम होते ही उनके अनुयायियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। सानंद के निधन से उपजे आक्रोश से उपजी किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एहतियातन हरिद्वार और देहरादून की पुलिस एम्स में तैनात कर दी गई है। सरकार और कई आला अधिकारी हर घटनाक्रम पर नजर गड़ाए हुए हैं।
एम्स प्रशासन के मुताबिक स्वामी सानंद पहले ही अपना शरीर एम्स, ऋषिकेश को दान किए जाने का संकल्प पत्र भर चुके थे, लिहाजा उनका शव एम्स में ही रखा गया है।
किसी विवाद से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन ने तय कि है कि शुक्रवार को एम्स के पांच फोरेंसिंक एक्सपर्ट की टीम उनके पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम करेगी। गौरतलब है कि इससे पूर्व गंगा की अविरलता की मांग को लेकर अनशन करते हुए वर्ष 2011 में मातृसदन से जुड़े स्वामी निगमानंद का भी निधन हो चुकाहै।