CM योगी के सामने किसानों के बाद आई इंजीनियरों की बड़ी चुनौती…

किसानों के उग्र तेवर के बाद अब योगी सरकार के सामने बिजली के अवर अभियंताओं ने भी चुनौती खड़ी कर दी है। पावर कॉर्पोरेशन के जूनियर इंजीनियर (जेई) एवं प्रमोटी इंजीनियरों (सहायक एवं अधिशासी अभियंता) ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद मंगलवार से 48 घंटे तक उपभोक्ता सेवाओं से अलग रहने का फैसला किया है।CM योगी के सामने किसानों के बाद आई इंजीनियरों की बड़ी चुनौती...

जेई के 4 अक्तूबर तक काम बंद रखने से प्रदेश में बिजली संकट खड़ा हो सकता है। बिजली व्यवस्था पटरी से उतरने की आशंका से पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए हैं। अवर अभियंताओं के रुख को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने सहायक व अधीक्षण अभियंताओं को तकनीकी कर्मियों की मदद से बिजली आपूर्ति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

जूनियर इंजीनियरों ने रिक्त पदों को भरने समेत कई अन्य समस्याओं व मांगों को पूरा कराने के लिए मंगलवार से सामूहिक अनशन भी शुरू किया है। वाराणसी, लखनऊ, मेरठ, आगरा एवं कानपुर के विद्युत वितरण निगम मुख्यालयों पर भी इंजीनियरों ने अनशन किया। वहीं, राजधानी में शक्ति भवन पर बड़ी संख्या में इंजीनियरों ने डेरा डाल दिया है।

राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के तत्वावधान में शक्ति भवन पर हुई सभा में केंद्रीय महासचिव जीबी पटेल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी जूनियर इंजीनियरों को उपभोक्ता सेवाओं के बड़े-बड़े लक्ष्य तो दे देते हैं, जो संसाधन के अभाव में पूरे नहीं हो पाते हैं। इसमें बिजली कनेक्शन देने एवं बकायेदारों की बत्ती काटने जैसे काम शामिल है।

एक-एक जेई पर तीन-तीन उपकेंद्रों की जिम्मेदारी

उपभोक्ताओं ने डिपॉजिट स्कीम के तहत एस्टीमेट की रकम जमा कर दी पर स्टोर से सामान नहीं मिल रहा। इससे बिजली कनेक्शन देना मुश्किल हो रहा है। एक-एक जेई पर तीन-तीन उपकेंद्रों की जिम्मेदारी है। इसलिए जेई की नई भर्तियां करना बेहद जरूरी है।

इस पर पावर कार्पोरेशन के चेयरमैन आलोक कुमार का कहना है कि अवर अभियंताओं से बातचीत चल रही है। इनकी जो भी जायज मांगे हैं उस पर विचार किया जाएगा।

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