नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही कंपनियों के अकाउंट डिपार्टमेंट कर्मचारियों से इनवेस्टमेंट डिक्लरेशन मांगने लगे हैं. अगर आप इनवेस्टमेंट डिक्लरेशन नहीं देते हैं तो नियोक्ता यानी कंपनी आपकी सैलरी से टीडीसी (टैक्स ऑन सोर्स) की कटौती करने लगेगी. यह टीडीएस आपकी कुल अनुमानित सैलरी के हिसाब से काटी जाएगी. दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 192 के तहत यह नियोक्ता की जवाबदेही होती है कि वह अपने कर्मचारियों से समय पर टैक्स की कटौती करे. इनवेस्टमेंट डिक्लरेशन में कर्मचारी चालू वित्त वर्ष के दौरान कर बचाने के लिए किए जाने वाले निवेश के बारे में जानकारी देता है. जब आप इनवेस्टमेंट डिक्लरेशन देते हैं तो आपकी कंपनी उतनी रकम अपनी सैलरी से घटा देती है. इससे आपका कर योग्य आय कम हो जाता है और कर का बोझ घट जाता है.

इन मदों में निवेश का दे सकते हैं डिक्लेरेशन 

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80सी के तहत निवेश सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. इसके तहत आप सालाना 1.5 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं. इसके अलावा आप 80डी और सेक्शन 24 के तहत भी इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन दे सकते हैं.

कोई सबूत नहीं देना होता

इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन में आपको केवल निवेश की जाने वाली राशि की जानकारी देनी होती है. इसके बदले कोई सपोर्ट डॉक्यूमेंट्स नहीं देने होता है. अधिकतर नियोक्ता आपसे 2019 के जनवरी-फरवरी ने सपोर्ट डॉक्यूमेंट्स या प्रूफ ऑफ इनवेस्टमेंट की मांग करते हैं. लेकिन आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आप जो इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन दे रहे हैं वो रियलिस्टिक हो. अगर आपने इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन बहुत ज्यादा दे दिया और उसके अनुसार से निवेश नहीं कर पाए तो जनवरी-फरवरी में एक साथ देय कर की राशि आपकी सैलरी से काट ली जाएगी.

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इन मदों में कर सकते हैं निवेश

आप कर बचाने के लिए म्यूच्युअल फंड्स के इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स, जीवन बीमा, पीपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृद्धि स्कीम और पांच वर्षीय टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं में निवेश कर सकते हैं. इसके अलावा अगर आपके स्कूल जाने वाले दो बच्चे हैं तो आप उनके ट्यूशन फीस को भी इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन में दिखा सकते हैं. इसके अलावा आप मेडिक्लेम प्रीमियम, न्यू पेंशन स्कीम, हाउस रेंट अलाउएंस को भी इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन में शामिल कर सकते हैं.

आपको क्या करना चाहिए

इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन देने के बावजूद आप उतनी ही राशि का निवेश करने के लिए बाध्य नहीं होते. आप पूरे साल के दौरान उससे कम भी निवेश कर सकते हैं. हालांकि साल के अंत में जब आप इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन के बदले जो सबूत या सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट देते हैं, उसी के आधार पर आपको कर में छूट मिलती है या कर की कटौती की जाती है. इसलिए आपको हर निवेश और खर्च की सबूत या सपोर्टिंग डॉक्यमेंट को संभालकर रखना होता है.