आपको बता दें कि इस महीने भारतीय वायुसेना के विमान दुर्घटना की ये दूसरी खबर है। जून महीने के शुरुआत में गुजरात में कच्छ के मुंद्रा जिले में एक भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू जेट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। पिछले साल मई में चीन की सीमा रेखा के पास एक सुखोई जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई थी। माना जा रहा था कि विमान में तकनीकी समस्या आ जाने के कारण उन्हें विमान के संचालन में परेशानी आ रही थी, जिसके परिणामस्वरूप जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया औऱ उन दोनों की मौत हो गई। इससे पहले 2015 में, सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान मध्य असम के नागाओन जिले के लाकोहोआ बोरोरिमारी गांव में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में पायलट और सह-पायलट दोनों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया था। गौरतलब है कि, सुखोई सु-30 एक रूसी निर्मित, दो इंजन वाला सैन्य विमान है जो हर मौसम में सफलतापूर्वक सैन्य मिशन में काम आता है। 1990 के उत्तरार्ध में सु-30 विमानों में से पहला आईएएफ द्वारा शामिल किया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, तब से अब तक कम से कम छह ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं। इनकी जांच में ज्यादातर तकनीकी विफलता का संकेत मिला है।