ऐसे होती है लालू के घर छठ पूजा, बेटी के साथ राबड़ी बनाती हैं प्रसाद
पटना.दीपावली के बाद अब पूरे बिहार में छठ पूजा की तैयारी जोरों पर है। गंगा और गंडक जैसी नदियों से लेकर तालाबों तक के घाटों की सफाई की जा रही है। इन्हीं घाटों पर 25 और 26 अक्टूबर को छठ पूजा की जाएगी। आरजेडी चीफ लालू यादव के घर में भी छठ पूजा की तैयारी चल रही है। हालांकि खराब सेहत के चलते राबड़ी देवी इस साल पूजा करेंगी या नहीं यह अभी साफ नहीं है।

छठ पूजा पर एकसाथ होता है लालू का परिवार…
– छठ पूजा के मौके पर लालू यादव का परिवार हर साल एकजुट होता है। लालू यादव की बेटियां अपने बच्चों के साथ मायके आती हैं।
– 2015 में लालू के घर में धूमधाम से छठ पूजा की गई थी। राबड़ी देवी ने व्रत किया था और बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के साथ बेटियां और उनके बच्चे सहायता करते दिखे थे।
– राबड़ी देवी छठ पूजा का प्रसाद खुद बनाती हैं। खरना के दिन खीर और रोटी हो या छठ के दिन ठेकुआ और खजूर राबड़ी खुद पूजा के लिए प्रसाद बनाती हैं। लालू ने अपने घर में एक छोटा तालाब बनवाया है, जिसमें राबड़ी छठ पूजा करती हैं।
– राबड़ी देवी छठ पूजा का प्रसाद खुद बनाती हैं। खरना के दिन खीर और रोटी हो या छठ के दिन ठेकुआ और खजूर राबड़ी खुद पूजा के लिए प्रसाद बनाती हैं। लालू ने अपने घर में एक छोटा तालाब बनवाया है, जिसमें राबड़ी छठ पूजा करती हैं।
इसे भी देखें:- पीएम मोदी ने पूरे देश को दिया ये अनमोल उपहार, पहले चरण का किया शुभारंभ
लोक आस्था का पर्व है छठ
– छठ को लोक आस्था का पर्व कहा जाता है। इस पर्व में व्रती अपनी आस्था से पूजा करते हैं। महिलाएं अपनी मां और रिश्ते की अन्य महिलाओं से पूजा की विधि सीखती हैं।
– छठ पर्व चार दिन तक चलता है। सबसे पहले नहाय खाय होता है। इस दिन व्रती नहाने के बाद लौकी की सब्जी खाते हैं। नहाय खाये के दिन से ही व्रत शुरू हो जाता है। व्रती दूसरे दिन शाम तक कुछ नहीं खाते।
– दूसरे दिन के पर्व को खरना कहा जाता है। इस दिन चावल, दूध और गुड़ से खीर और रोटी बनाई जाती है। खीर और रोटी से पूजा करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। खरना का प्रसाद खाने के बाद महिलाएं दो दिन का निर्जला व्रत शुरू करती है।
– छठ के तीसरे दिन नदी और पोखर के घाट पर शाम को डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। इसके बाद चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा संपन्न होती है।
– छठ पर्व चार दिन तक चलता है। सबसे पहले नहाय खाय होता है। इस दिन व्रती नहाने के बाद लौकी की सब्जी खाते हैं। नहाय खाये के दिन से ही व्रत शुरू हो जाता है। व्रती दूसरे दिन शाम तक कुछ नहीं खाते।
– दूसरे दिन के पर्व को खरना कहा जाता है। इस दिन चावल, दूध और गुड़ से खीर और रोटी बनाई जाती है। खीर और रोटी से पूजा करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। खरना का प्रसाद खाने के बाद महिलाएं दो दिन का निर्जला व्रत शुरू करती है।
– छठ के तीसरे दिन नदी और पोखर के घाट पर शाम को डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। इसके बाद चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा संपन्न होती है।





