तो इसलिए बढ़ते जा रहे है पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें पूरा मामला…

देश में पेट्रोल डीज़ल के दामों में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। इसके विरोध में आज कांग्रेस पार्टी द्वारा पुरे भारत  में देशव्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है। यह आंदोलन कई जगह तीव्र रूप लेता दिख रहा है और इस पर देश भर में राजनीतिक सियासत भी शुरू हो चुकी है। लेकिन क्या आप जानते है कि देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमते अचानक इतनी तेजी से क्यों  बढ़ रही है और इसमें किस सरकार का कितना हिस्सा होता है। अगर नहीं तो निराश मत होइए क्योकि आज हम आपको पेट्रोल -डीज़ल के दामों में लगी इस आग के विभिन्न्न पहलू से रूबरू करवाने जा रहे है। 

कच्चे तेल की कीमत भी बढ़ी है लेकिन… 

ये बात तो सही है कि विश्व में इस वक्त क्रूड आयल यानी कच्चे तेल की कीमते भी बढ़ी है  लेकिन देश में पेट्रोल डीज़ल के दामों के बढ़ने की ये इकलौती वजह नहीं है। उदहारण के तौर पर 10 सितंबर 2018 को कच्चे तेल की कीमत 4,883 रुपये प्रति बैरल है। एक बैरल में 159 लीटर होते है। इस हिसाब से भारत में आयात होने वाले तेल की कीमत मात्र  30.71 रुपये है। परन्तु देश में पेट्रोल की कीमत तकरीबन 80 रुपये लीटर के पार हो चुकी है। 

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न निर्माण शुल्क न आयत, सबसे बड़ा है TAX 

भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दामों के आसमान छूती कीमतों का सबसे बड़ा कारण है उसपे लगने वाले विभिन्न तरह के टैक्स। दरअसल पेट्रोल-डीज़ल देश की उन चीजों में से है जिनपर सबसे ज्यादा टैक्स लगता है। हाल ही में गैसोलीन नेटवर्क की एक रिपोर्ट के मुताबिक हम जिस कीमत पर पेट्रोल खरीदते हैं उसका सिर्फ 48 फीसदी उसका निर्माण मूल्य होता है जबकि बाकि का पूरा हिस्सा टैक्स होता है। 

 

 

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