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बढ़ रही हैं सत्येंद्र जैन की मुश्किलें, आप के 48 विधायकों के दागदार दामन

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो/ राकेश कुमार सिंह। दिल्ली सरकार में सबसे विवादित मंत्री के रूप में मंत्री सत्येंद्र जैन की छवि बनती जा रही है। इन पर कई तरह के आरोप लग चुके हैं। इस कारण इन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की भी मांग उठ चुकी है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के करीबी होने के चलते जैन अभी तक बचते आए हैं। मगर जिस तरह से जैन पर विभिन्न जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है ऐसे में आने वाले समय में जैन का पद पर बने रहना आसान नहीं होगा।बढ़ रही हैं सत्येंद्र जैन की मुश्किलें, आप के 48 विधायकों के दागदार दामन

बहरहाल जैन पर क्या हैं आरोप और कब-कब चर्चा में रहे हैं डालते हैं एक नजर

– कुछ माह पहले दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार को रिश्वत के मामले में सीबीआइ ने गिरफ्तार किया था। जैन की संपत्ति के दस्तावेज डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. ऋषिराज के लॉकर में मिले थे। सीबीआइ अब भी जांच कर रही है कि जैन के दस्तावेज डॉ. ऋषिराज के लॉकर में कैसे पहुंचे?

– जैन पर मनी लांड्रिंग का आरोप लग चुका है। आरोप है कि सत्येंद्र जैन ने 2015-16 के दौरान लोक सेवक रहते हुए 4.63 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग की। यह राशि प्रयास इंफो सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, अकिनचंद डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और मंगलायतन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से दी गई। इसके अलावा इंडोमेटल प्राइवेट लिमिटेड के जरिये 2010-12 के दौरान भी 11.78 करोड़ रुपये का मनी लांड्रिंग का जैन पर आरोप है। इस मामले में 3 अप्रैल 2018 और 11 अप्रैल 2018 को जैन से पूछताछ हुई है

– मंत्री पद से हटाए जाने के बाद कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मंत्री सत्येंद्र जैन को दो करोड़ रुपये मुख्यमंत्री को उनके घर देते हुए देखा था। केजरीवाल ने आज तक इस आरोप पर कोई जवाब नहीं दिया है। इस मामले में सत्येंद्र जैन ने कपिल मिश्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया हुआ है। मामला अभी कोर्ट में है।

केजरीवाल के रिश्तेदार को बनाया था ओएसडी

सत्येंद्र जैन ने डॉ. निकुंज अग्रवाल को अपना ओएसडी (स्वास्थ्य) बनाया था। निकुंज अग्रवाल अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। निकुंज अग्रवाल की नियुक्ति में हुई गड़बड़ी के मामले में सीबीआइ ने 30 दिसंबर 2016 को दिल्ली सचिवालय में छापा मारा था। इसके बाद जैन ने निकुंज को ओएसडी के पद से हटा दिया था।

सुरेंद्र बंसल को फर्जी बिल पर किया भुगतान

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साढ़ू सुरेंद्र बंसल (दिवंगत) ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों के फर्जी बिलों के भुगतान के लिए उनके नाम का सहारा लिया। इस मामले में हुई एफआइआर में मुख्यमंत्री का भी नाम है। लोक निर्माण मंत्री जैन ही शुरू से हैं भाजपा व कांग्रेस के लोग इसपर भी आरोप लगा रहे हैं।

बेटी को बनाया हेल्थ मिशन का निदेशक

जैन ने बेटी सौम्या जैन को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्टेट हेल्थ मिशन में 18 अप्रैल 2016 को सलाहकार नियुक्त किया था। सौम्या ने इसके लिए 1 अप्रैल 2016 को आवेदन किया था। लेकिन, लेटर के मुताबिक इस मामले में संदेह की बात यह है कि 18 अप्रैल से सौम्या की नियुक्ति के मामले को सरकार की मंजूरी 10 मई, 2016 को मिली। यही नहीं आवेदन और बायोडेटा के मुताबिक उनके पास स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने का कोई अनुभव नहीं था। यही नहीं, सौम्या ने कहा था कि वह कोई मानदेय नहीं लेंगी। लेकिन, उनके टूर और प्रशक्षिण पर 1.15 लाख रुपये खर्च किए गए। बाद ममाला तूल पकड़ने पर सौम्या जैन को इस्तीफा देना पड़ा था।

छापे से आप में खलबली
जैन के यहां सीबीआइ के छापे को लेकर आप में खलबली मची हुई है। बेटी को नौकरी देने व केजरीवाल के कथित रिश्तेदार निकुंज अग्रवाल को नियमों को धता बताकर अपना ओएसडी बनाने के बाद यह तीसरा मामला है जिसमें सीबीआइ ने सीधे तौर पर उन पर शिकंजा कसा है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि कल सत्येंद्र ने प्राइवेट अस्पतालों की मुनाफाखोरी के खिलाफ नीति का एलान किया, आज केंद्र सरकार ने सीबीआइ की रेड करा दी। भाजपा यह नीति खारिज करवाना चाहती है। हम सीबीआइ से डरने वाले नहीं।

सीबीआइ जांच सुन 24 विशेषज्ञ छोड़ गए थे नौकरी

जिस क्रिएटिव डिजाइनर टीम के गठन के मामले में मंत्री सत्येंद्र जैन के यहां बुधवार को सीबीआइ छापा पड़ा है। इस टीम के गठन की सीबीआइ जांच शुरू होने की सिफारिश पर ही सभी 24 विशेषज्ञ अपनी सेवाओं से इस्तीफा दे गए थे। उन्हें पता चल गया था कि उनकी नियुक्ति गलत तरीके से हुई है। 2015 में आप के सत्ता में आने पर लोक निर्माण विभाग के 12 आर्किटेक्ट को हटा दिया गया था। जैन ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा

था कि इन सभी आर्किटेक्ट की उन्हें जरूरत नहीं है। इसलिए वह इन्हें वापस भेज रहे हैं। इन आर्किटेक्ट के केंद्रीय लोक निर्माण में जाने पर मंत्री जैन ने महंगा वेतन देकर क्रिएटिव डिजाइनर टीम का गठन किया था। जिसमें 24 विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई थी। इन विशेषज्ञों में पर्यावरण योजनाकार, लैंडस्केप योजनाकर, आर्किटेक्ट, शहरी योजनाकार, उत्पादन एवं औद्योगिक डिजाइनर व सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदि शामिल थे।

इनकी नियुक्ति पर भाजपा ने सवाल उठाए थे। जिस पर दिल्ली सरकार ने सफाई दी थी कि ढांचागत विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को शुरू कराने के लिए सरकार को निजी तौर पर प्रैक्टिस कर रहे विशेषज्ञों की शरण लेनी होती है। इसलिए इस टीम का गठन किया गया है। इस टीम पर 65 लाख रुपये खर्च कर दिए गए थे। अगस्त 2016 में अपने हक में आए हाई कोर्ट के फैसले के बाद उपराज्यपाल नजीब जंग ने इस मामले को भी जांच के लिए शुंगलू कमेटी को सौंप दिया था। कमेटी ने जांच में प्राथमिक स्तर पर ही गड़बड़ी पाई थी। जिसमें एक गड़बड़ी यह भी थी कि इस मामले में उपराज्यपाल से अनुमति नहीं ली गई थी। जिस पर उपराज्यपाल ने इस मामले को जांच के लिए सीबीआइ को सौंप दिया था। जब विशेषज्ञों को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने नौकरी छोड़ना मुनासिब समझा।

आप के 48 विधायकों के दामन हैं दागदार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित निवास पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के बाद अब स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग के मंत्री सत्येंद्र जैन के कई ठिकाने पर बुधवार को सीबीआइ के छापे मारने को लेकर सूबे में एक बार फिर तहलका मच गया है। केजरीवाल की अगुवाई वाली इस पार्टी में दबंगई करने वाले विधायकों की कमी नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस पार्टी में 48 से ज्यादा विधायक हैं, जिनके खिलाफ दिल्ली के विभिन्न थानों, सीबीआइ व एसीबी में 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज है। कुछ मामलों में विधायक कोर्ट से बरी भी हो गए हैं तो अधिकतर मामले अभी विचाराधीन ही है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जिन विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज हैं उनमें मॉडल टाउन के अखिलेश पति त्रिपाठी, चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा, ओखला के अमानतुल्लाह खां, बल्लीमारन के इमरान हुसैन, मटिया महल के आसिम अहमद खान, शालीमारबाग की बंदना कुमारी, पालम की भावना गौड़, दिल्ली कैंट के कमांडर सुरेंद्र सिंह, महरौली के नरेश यादव, बिजवासन के देवेंद्र सहरावत, संगम विहार के दिनेश मोहनिया, मटियाला के गुलाब सिंह, तिलक नगर के जरनैल सिंह, राजौरी गार्डन के जरनैल सिंह, त्रिनगर के जितेंद्र सिंह तोमर, नजफगढ़ के कैलाश गहलौत, छतरपुर के करतार सिंह तंवर, विकासपुरी के महेंद्र यादव, पटपड़गंज के मनीष सिसोदिया, कोंडली के मनोज कुमार, उत्तम नगर के नरेश बाल्यान, आदर्श नगर के पवन शर्मा, देवली के प्रकाश जारवाल, आरके पुरम की प्रमिला टोकस, नांगलोई के राघवेंद्र सिंह शौकीन, जनकपुरी के राजेश ऋषि, मंगोलपुरी की राखी बिड़लान, शाहदरा के राम निवास गोयल, किराड़ी के ऋतुराज झा, तुगलकाबाद के सहीराम, सुल्तानपुरी माजरा के संदीप, बुराड़ी के संजीव झा, रोहताश नगर के सरिता सिंह, शकूर बस्ती के सत्येंद्र जैन, गे्रटर कैलाश के सौरभ भारद्वाज, नरेला के शरद चौहान, मोती नगर के शिवचरण गोयल, सदर बाजार के सोमदत्त, मालवीय नगर के सोमनाथ भारती, मुंडका के सुखवीर सिंह बादल, वजीरपुर के राजेश गुप्ता, बवाना के वेद प्रकाश, राजेंद्र नगर के विजेंद्र गर्ग, त्रिलोकपुरी के राजू धिंगान, करोलबाग के विशेष रवि व धर्मेंद्र कोहली शामिल हैं। इनमें कइयों पर छह से ज्यादा मामले भी दर्ज हैं।

जैन का पद पर बने रहना लोकतंत्र के खिलाफ भाजपा

दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ सीबीआइ द्वारा मामला दर्ज करने के बाद भाजपा ने उनका इस्तीफा मांगा है। भाजपा का कहना है कि अब उनका मंत्रिमंडल में बने रहना लोकतांत्रिक परंपराओं के विरूद्ध है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उन्हें बचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें खुद व अन्य आप नेताओं के कानूनी शिकंजे में फंसने का डर सता रहा है। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री तीन वर्षों में अपने कई नेताओं व रिश्तेदारों के भ्रष्टाचार के मामले में चुप्पी साध चुके हैं। उन्हें बचाने की भी उन्होंने हरसंभव कोशिश की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जैन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, क्योंकि वह आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के सारे राज जानते हैं। यदि उन्होंने अपना मुंह खोला तो आप

के कई बड़े नेताओं पर कानूनी शिकंजा कस जाएगा। इसलिए मुख्यमंत्री व आप के अन्य नेता उनके बचाव में खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए तीन वर्षों में केजरीवाल ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमार स्वामी से भ्रष्टाचार को संरक्षण देना बखूबी सीख लिया है।

दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य आप नेता जिस तरह से जैन का बचाव कर रहे हैं उससे पता चलता है कि आप ने भ्रष्टाचार से समझौता कर लिया है। उन्हें भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय प्रधानमंत्री को कोसने की आदत पड़ गई है। भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के साथ बिना शर्त समझौता कर लिया है। उन्हें अपने चारों तरफ अपने निकटतम साथियों का भ्रष्टाचार दिखाई नहीं दे रहा है। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए आप नेताओं के रिश्तेदारों व आप कार्यकर्ताओं को भारी-भरकम वेतन पर लोक निर्माण विभाग की रचनात्मक टीम में शामिल कर लिया गया। इस टीम पर दो वर्षों में गलत तरीके से सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए।

केजरीवाल व जैन से कांग्रेस ने की इस्तीफे की मांग

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन से इस्तीफे की मांग की है। दोनों को ही नैतिक दृष्टि से अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी जब सत्ता से बाहर थी तो बिना बात के ही हर किसी से इस्तीफा मांग लिया करती थी। जबकि आज उनके मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीबीआइ एफआइआर तक दर्ज कर चुकी है। पहले भी उन पर कई आरोप लग चुके हैं। इस नाते केजरीवाल को भी नैतिकता का परिचय देते हुए अपना पद छोड़ देना चाहिए। दूसरी तरफ माकन ने सीबीआइ से भी जैन के खिलाफ लग रहे आरोपों की गंभीरता से जांच करने का अनुरोध किया है। सत्येंद्र जैन के खिलाफ सीबीआइ कई बार छापेमारी कर चुकी है, जबकि बाद में कुछ निकलता नहीं है।

कपिल मिश्रा ने बोला मुख्यमंत्री पर जुबानी हमला

दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ सीबीआइ कार्रवाई को लेकर आप के नाराज विधायक कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि सीबीआइ की कार्रवाई पर ये दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की भाषा बोल रहे हैं। जो हाल लालू यादव का हुआ है वहीं हाल इन लोगों का भी होगा। उन्होंने कहा कि प्राथमिक जांच के बाद सीबीआइ ने जैन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन, मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री उनका बचाव कर रहे हैं। दरअसल मुख्यमंत्री को मालूम है कि उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। जैन पर फर्जी कंपनियां चलाने, हवाला के जरिये दिल्ली में जमीन खरीदने और उसे बचाने के लिए सरकार की नीतियों में बदलाव करने का आरोप है। उन्होंने गलत तरीके से मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों को भी लाभ पहुंचाया है जिसकी जांच चल रही है। 

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