मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रहित सबसे बढ़कर होता है. मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना रखने वाला व्यक्ति ही देश की उन्नति में सहायक हो सकता है. सीएम आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शहीद स्वाभिमान यात्रा को देहरादून से आगे के लिए रवाना किया. बता दें कि इस यात्रा का मकसद देश के शहीदों और उनके परिवारों को सम्मान देने, भारतीय सेना के वेतन को कर मुक्त करना है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जन्मभूमि को माता माना गया है. हमारा पहला दायित्व अपनी मातृभूमि के प्रति होता है. देश को स्वतंत्र कराने और उसके बाद देश की आजादी को बनाए रखने में शहीद होने वाले भारत माता के वीर सपूतों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. बड़ी खुशी की बात है कि हमारे युवाओं में शहीदों के प्रति सम्मान की भावना है.

79 दिनों तक देश के 23 राज्यों में अब तक 16500 किमी की यात्रा पूरी

मुख्यमंत्री ने स्वाभिमान यात्रा के संयोजक सुरेंद्र सिंह बिधुड़ी व उनके साथियों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि स्वाभिमान यात्रा अपने उद्देश्यों में सफल होगी. गौरतलब है कि शहीद स्वाभिमान यात्रा 23 मार्च को नई दिल्ली से प्रारम्भ हुई थी. 79 दिनों तक देश के 23 राज्यों में अब तक 16500 किमी की यात्रा पूरी कर शनिवार को देहरादून पहुंची थी. कुल मिलाकर 29 राज्यों में 25 हजार किमी की यात्रा पूरी की जाएगी.

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देहरादून में नहीं लगाई गई प्रतिमा

राजधानी के कंडोली चीडोवाली में नगर निगम ने शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमा के लिए जगह आवंटित की है. लेकिन अभी तक प्रतिमा नहीं लगी. जबकि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से बनाये गए पार्क का नाम सीनियर सीईजन पार्क नाम रखा गया है, जबकि पार्क भगत सिंह के नाम होना था.