अभी-अभी: रामदेव के फूड पार्क से जुड़े प्रस्तावों CM योगी ने दी मंजूरी

प्रदेश सरकार ने बाबा रामदेव के मेगा फूड पार्क की नोएडा में स्थापना संबंधी अड़चन दूर कर दी है। कैबिनेट ने मंगलवार को बाबा की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को दी गई सभी सुविधा व रियायतें उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क नोएडा को देने को मंजूरी दे दी है। इससे केंद्र सरकार की शर्त पूरी हो गई है।अभी-अभी: रामदेव के फूड पार्क से जुड़े प्रस्तावों CM योगी ने दी मंजूरी

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने बताया कि पतंजलि आयुर्वेद को मेगा परियोजना के तौर पर 20 फीसदी भूमि की सबलीज की सुविधा और भूमि की आवंटन दर में 25 फीसदी छूट मिलती है। कंपनी के पास 455 एकड़ जमीन उपलब्ध है। केंद्र सरकार की मेगा फूड पार्क पॉलिसी में  एसपीवी (स्पेशल परपज व्हीकल) कंपनी को ही सुविधाएं देने की व्यवस्था है।

बाबा ने एसपीवी पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क नोएडा को पतंजलि आयुर्वेद की तरह सुविधा व रियायतें देने की मांग की थी। इसके लिए कैबिनेट ने पतंजलि आयुर्वेद नाम के साथ पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क नोएडा नाम जोड़ने को मंजूरी दे दी है। इससे एसपीवी कंपनी को 20 प्रतिशत भूमि की सबलीज की सुविधा और भूमि आवंटन की दर में छूट पाने का रास्ता साफ हो गया है। फैसले से सरकार पर कोई अतिरिक्त भार भी नहीं आएगा। साथ ही केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की शर्त भी पूरी हो गई है।

कंपनी अब मेगा फूड पार्क का काम तय योजना के साथ आगे बढ़ा सकेगी। पांडेय ने बताया कि मेगा फूड पार्क की स्थापना से प्रदेश में पूंजी निवेश का रास्ता साफ होगा और किसानों को उनके कृषि उत्पाद का उचित मूल्य व बाजार मिल सकेगा। इससे रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

अयोध्या में बस डिपो बनाने के लिए दी जाएगी संस्कृति विभाग की जमीन

प्रदेश सरकार ने अयोध्या में बस डिपो बनाने में भूमि की दिक्कत को दूर कर दिया है। इसके लिए संस्कृति विभाग की 1.384 हेक्टेयर भूमि पर्यटन विभाग को नि:शुल्क दी जाएगी। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अयोध्या में हर साल आने वाले स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की सुविधा के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना के तहत अयोध्या में पर्यटन विकास के लिए 133.30 करोड़ रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इसमें 704.64 लाख की लागत से साकेत पट्रोल पंप के पास बस डिपो का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए भूमि की दिक्कत आ रही थी। लिहाजा सरकार ने अयोध्या बाईपास पर जय पेट्रोल पंप के पास संस्कृति विभाग की खाली पड़ी 1.384 हेक्टेयर भूमि को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने का फैसला किया है।

काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के लिए गठित होगा विकास परिषद
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार ने एक स्वतंत्र इकाई के तौर पर श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद का गठन करने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी। इससे संबंधित धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। अब इसी परिषद के माध्यम से काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा।

सरकार का मानना है कि भगवान शंकर के द्वादश ज्योर्तिलिंगों में एक महत्वपूर्ण ज्योर्तिलिंग के रूप में विराजमान काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र अध्यात्म के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से भी अति महत्वपूर्ण स्थान हो गया है। यहां की प्राचीनता और विविधता को देखने के लिए इतनी ही संख्या में विदेशी सैलानी भी आते हैं।

पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए ही सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के विस्तार और सुंदरीकरण कराने के लिए 413.10 करोड़ रुपये की लागत की योजनाएं शुरू की गई है। योजना के तहत ही काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के विस्तार के लिए पास के दशाश्वमेध और गढ़वासी टोला वार्डों में पड़ने वाले करीब 166 भूमि व भवनों को अधिगृहित करके उसका भी विकास किया जाना प्रस्तावित है।

औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के कर्मियों के तबादले का रास्ता साफ

औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में कार्यरत कर्मियों का अब एक प्राधिकरण से दूसरे प्राधिकरण में तबादला हो सकेगा। प्रदेश कैबिनेट ने इसके लिए यूपी इंडस्ट्रियल एरिया डवलपमेंट एक्ट-1976 के तहत उप्र. औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीय सेवा नियमावली-2018 को मंजूरी दे दी है।

दरअसल, योगी सरकार ने सत्ता संभालने के कुछ दिन बाद ही औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में कार्यरत कर्मियों के एकाधिकार को तोड़ने के लिए एक प्राधिकरण से दूसरे में स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके लिए औद्योगिक विकास विभाग को नियमावली बनाने का निर्देश दिया गया था। मंगलवार को विभाग ने कैबिनेट के सामने इससे जुड़ी नियमावली पेश की जिसे मंजूरी दे दी गई।

औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने बताया कि अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गीडा, सीडा, लीडा, यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण, यूपीडा व यूपीसीडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को एक से दूसरे प्राधिकरण में स्थानांतरित करने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की कार्यकुशलता व पारदर्शिता में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए एक प्राधिकरण से दूसरे में तबादले की व्यवस्था की गई है। नई नियमावली के दायरे में आने वाले कर्मियों के वेतन पर आने वाले खर्च का वहन संबंधित प्राधिकरण करेंगे। इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त भार नहीं आएगा।

यूपीएसआईडीसी के औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विलय को मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने यूपी राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) का यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यूपीएसआईडीसी अब यूपीसीडा के नाम से जाना जाएगा। यूपीएसआईडीसी एक सेल कंपनी के रूप में काम करती रहेगी।
औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि यूपीएसआईडीसी कंपनी एक्ट 1956 में गठित राज्य सरकार के पूर्ण स्वामित्व की कंपनी है। इसके पास नक्शा पास करने, मास्टर प्लान की मंजूरी जैसे तमाम अधिकार नहीं है। लेकिन राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास ये शक्तियां हैं।उन्होंने बताया कि यूपीएसआईडीसी का यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विलय से निगम की संपत्तियां, देनदारियां, शक्तियां, क्रियाकलाप व कर्मचारी यूपी राज्य औद्योगिक विकास क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत गठित यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित हो जाएंगे।

उन्होंने बताया कि निगम की संपत्तियां व दायित्व प्राधिकरण के पास चले जाने के बाद निगम एक सेल कंपनी के रूप में काम करेगा। निगम द्वारा किए जाने समस्त भुगतान प्राधिकरण द्वारा किया जाता रहेगा। कर्मचारियों की सेवा शर्तों, निगम में नियत दिनांक को लागू सेवा शर्तों की अपेक्षा किसी भी स्थिति में कम अनुकूल नहीं होंगे। इसके अलावा निगम की संपत्तियों और दायित्वों के प्राधिकरण में स्थानांतरित होने पर स्टांप शुल्क से छूट रहेगी।

पैरामेडिकल ट्रेनिंग कॉलेज झांसी के लिए पुनरीक्षित बजट को मंजूरी

पैरा मेडिकल ट्रेनिंग झांसी के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत 403.5619 करोड़ के व्यय प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस पुनरीक्षित बजट में ग्लेजिंग, ग्रेनाइट फ्लोरिंग, पेविट टाइल्स, वुड ब्लॉक, फ्लोरिंग, वुडेन पेनलिंग, एंटीस्किड, एसिड प्रूफ टाइल्स, फाल्स सीलिंग, फ्लोर कारपेट आदि मदों का अनुमोदन किया जाना है। 364 करोड़ रुपये से इस कॉलेज का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष 10 फीसदी में स्पोर्ट्स ग्राउंड और हर्टीकल्चर का कार्य बाकी है।

पैरामेडिकल ट्रेनिंग कॉलेज झांसी के निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि कॉलेज 84 एकड़ भूमि पर बना है। इसमें छह एजुकेशन ब्लॉक, एक एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक और ऑडिटोरियम है। कॉलेज में बैचलर डिग्री के 14 पाठ्यक्रम होंगे। अभी फिजियोथेरेपी, डायलिसिस, सीटी स्कैन, एमआरआई के चार डिप्लोमा पाठ्यक्रम चल रहे हैं। 30-30 सीटें वाला यह तीसरा बैच है। सितंबर तक बीएससी नर्सिंग शुरू करने की तैयारी है। बीएससी इन इमेजिंग, फिजियोथेरेपी, लैब टेकभनीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, हॉस्पिटल मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।

मुरादाबाद में पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के ध्वस्त होंगे दो आवास
मुरादाबाद में पीडब्ल्यूडी की आवासीय कॉलोनी में दो भवनों को ध्वस्त करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। ये आवास 110 वर्ष पुराने थे और रहने लायक नहीं बचे हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इन भवनों के स्थान पर टाइप-4 के नए आवास बनाए जाएंगे।

दो लेन होगा हमीरपुर-राठ मार्ग

हमीरपुर-राठ मार्ग को इंडियन रोड कांग्रेस के मानकों को शिथिल करते हुए दो लेन करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस सड़क के निर्माण से पूरे क्षेत्र का आर्थिक एवं सामाजिक विकास होगा। आवागमन में काफी आसानी हो जाएगी।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि अनुबंध होने के 24 महीनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा होगा। स्थानीय लोगों को करीब 45 हजार मानव दिवस का रोजगार भी मिलेगा। निर्माण ईपीसी मोड से होगा, जिस पर करीब 349 करोड़ 46 लाख 62 हजार रुपये लागत आएगी। यहां बता दें कि विश्व बैंक ने उत्तर प्रदेश कोर रोड नेटवर्क डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट के तहत 400 मिलियन यूएस डॉलर देने के लिए सहमति दी है। यह कार्य इसी योजना के तहत होगा।

बाण सागर नहर परियोजना की पुनरीक्षित लागत पर मुहर
बाण सागर नहर परियोजना की 3420.24 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित लागत के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। वर्ष 1988-89 से लंबित इस परियोजना के पूरा होने पर 1,50,132 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकेगी।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मिर्जापुर और इलाहाबाद के पठारी क्षेत्रों को लाभान्वित करने के लिए यह परियोजना स्वीकृत की गई थी। इसकी मूल लागत 330.19 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2003, 2007 और 2008 में लागत पुन: पुनरीक्षित की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य में अदवा-मेजा लिंक नहर का निर्माण 15 जुलाई तक पूरा करना है।

बाण सागर नहर परियोजना के अवशेष कार्यों को पूरा करने के लिए 29 नवंबर 2017 को हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में इसकी लागत 3420.24 करोड़ रुपये अनुमोदित की गई। मंगलवार को समिति की पुनरीक्षित लागत को कैबिनेट की भी सहमति मिल गई। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि जल्द ही परियोजना पूरी कर ली जाएगी।

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