मोदी सरकार के प्रति रामविलास का सख्त तेवर, कहा-दलित मुद्दे पर धैर्य दे रहा जवाब

चुनावी वर्ष में राजग के अंदर का घमासान लगातार सार्वजनिक हो रहा है। जदयू, शिवसेना के बाद भाजपा की एक और सहयोगी लोजपा ने दलित मुद्दे पर धैर्य के जवाब देने का हवाला देते हुए भविष्य में मुद्दा आधारित समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी ने कहा है कि अगर एनजीटी चेयरमेन जस्टिस एके गोयल को 9 अगस्त तक उनके पद से नहीं हटाया गया और एससी-एसटी कानून को नए सिरे से संसद के इसी सत्र में बतौर बिल पेश नहीं किया गया तो पार्टी 9 अगस्त को दलित संगठनों के द्वारा बंद की घोषणा का समर्थन करेगी। 

लोजपा सांसद चिराग पासवान ने कहा कि हम चार महीने से लगातार इंतजार कर रहे हैं। हमारा धैर्य जवाब दे रहा है। लोजपा-भाजपा का गठबंधन की नीव दलित हितों की रक्षा थी। हम अब और इंतजार नहीं कर सकते। हमारी नहीं सुनी गई तो पार्टी 9 अगस्त को आहूत भारत बंद के समर्थन में सड़कों पर उतरेगी। चिराग ने हालांकि कहा कि उनकी पार्टी का अब भी प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा है। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में रत्ती भर बदलाव न होने देने का वादा किया था। 

पासवान ने कहा कि हम चार महीने से एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलावों पर रोक लगाने केलिए अध्यादेश की मांग कर रहे हैं। इसी बीच इस आशय का फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का चेयरमेन बना दिया गया। हमारा साफ कहना है कि सरकार 9 अगस्त तक जस्टिस गोयल को उनके पद से हटाए। एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव लाने पर हमेशा केलिए रोक लगाने के लिए इसे नए सिरे से बिल के रूप में 7 अगस्त तक संसद के वर्तमान सत्र में पेश करे। ऐसा नहीं होने पर हम फिर से मिल बैठ कर निर्णय लेंगे।  

शिवसेना ने की है अयोध्या-काशी कूच करने की घोषणा 
अरसे से नाराज चल रही भाजपा के एक अन्य सहयोगी शिवसेना के अध्यक्ष उद्घव ठाकरे ने जल्द अयोध्या और काशी का दौरा करने की घोषणा की है। इसे भाजपा के हिंदुत्व के काट में शिवसेना के सियासी दांव के रूप में देखा जा रहा है। शिवसेना पहले ही लोकसभा चुनाव अकेले लडने की घोषणा कर चुकी है। बीते हफ्ते लोकसभा में सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करने के बदले पार्टी ने संसद की कार्यवाही से ही दूरी बना ली थी। 

आश्वासन के बाद शांत है जदयू 
बिहार में सीटों पर फंसे पेच के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सम्मानजनक समझौते के आश्वासन के बाद जदयू फिलहाल शांत है। इससे पहले इस सवाल पर दोनों दलों में तीखी नोंकझोंक हुई थी। जदयू को सितंबर तक इस विवाद के निपटारे की उम्मीद है। अगर सकारात्मक पहल नहीं हुई जो जदयू ने भी तेवर दिखाने के संकेत दिए हैं। 

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