सरकारी नहीं, सृजन के खाते से होता था किसानों को मुआवजे का भुगतान, ठेकेदार को पेमेंट

भागलपुर.सृजन न केवल सरकारी खजाने को लूटती थी बल्कि सरकारी विभाग की तरह उस राशि का भुगतान भी करती थी। भू-अर्जन व डूडा के खातों की जांच से यह नया मामला सामने आया है। विभाग को जिस किसान और ठेकेदार-एजेंसी को भुगतान करना होता था, उन्हें सीधे सृजन के खाते से ही कर दिया जाता था। विभाग में पैसा आने के बाद सीधे सृजन के खाते में जाता था और वहीं से आरटीजीएस या चेक के माध्यम से पेमेंट हो जाता था। 
सरकारी नहीं, सृजन के खाते से होता था किसानों को मुआवजे का भुगतान, ठेकेदार को पेमेंट
फिर सृजन के कैशबुक से मिलान कर विभाग का कैशबुक अपडेट कर दिया जाता था ताकि राशि की हेरफेर पकड़ में न आ सके। फिर उसी कैशबुक के आधार पर फर्जी बैंक स्टेटमेंट तैयार कर दिया जाता था। जिला प्रशासन इसे ही असली मान लेता था।
जिला नजारत के नाजिर अमरेंद्र यादव के पकड़े जाने पर असली कहानी सामने आएगी क्योंकि वह विभाग में पैसे आने पर उसे सृजन को भेजता था। वही नजारत के कैशबुक को अपडेट करता था। अमरेंद्र बीते 25 दिनों से फरार है। 
सवाल उठता है कि सृजन को पैसे भेजने और वहां से ठेकेदार व एजेंसी को भुगतान करने से क्या लाभ मिलता था? दरअसल, सृजन को विभागों से मोटी रकम का चेक भेजा जाता था। उस राशि को खाते में रखकर खूब ब्याज कमाई जाती थी।

पढ़िये कैसे सृजन के खाते से लाभुकों को हुआ भुगतान

1. पहला मामला भू-अर्जन के 17.29 करोड़ का है। इसका चेक 27 जनवरी, 2014 को नजारत में आया। 16 जून को निकासी की गई। नजारत के कैशबुक में निकासी दिखा दी गई जबकि जांच में पता चला यह चेक बैंक में जमा नहीं हुआ था। यह पैसा सृजन को चला गया। वहीं से भुगतान हुआ। सृजन के कैशबुक पर चढ़ा और उसी को देखकर भू-अर्जन के कैशबुक में उसे अपडेट कर दिया गया। फर्जी बैंक स्टेटमेंट में उसी अपडेट को दिखाया गया।
2. भू-अर्जन के खाते से राशि सृजन को भेजा गया। वहां से कई किसानों को मुआवजा दिया गया। ऐसे 10 किसान मिले हैं। यह राशि पीरपैंती पावर प्लांट प्रोजेक्ट की थी। जिन 10 किसानों को सृजन से भुगतान किया गया है, उनमें से ज्यादातर के नाम एसके से हैं।
3. कल्याण विभाग की इनवेंट्री तैयार करने के दौरान एक चौंकाने वाला सच सामने आया कि विभाग का भी खाता सृजन में है। 115 करोड़ रुपए खाते से गायब हैं। कई मामले ऐसे हैं कि चेक आया पर बैंक में जमा ही नहीं हुआ। बैंक ऑफ बड़ौदा में विभाग की ओर से जमा राशि की बड़े पैमाने पर हेरफेर हुई है।
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