एक अजीबो गरीब घटना: ’10 साल की बच्ची बनी मां’ लेकिन उस बच्ची की नवजात बच्ची ने कही अपने दिल की बात

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जुलाई 2010 में एक ऐसी घटना को अंजाम दिया गया जिसे जानकर सभी हैरान रह गए थे जब एक 10 साल की बच्ची का उसके अपने मामा ने रेप कर दिया और कई दिनों तक उसे बंदी बनाकर रेप करता रहा. फिर वो बच्ची गर्भवती हो गई और उस बच्ची का केस किसी तरह जिला अदालत पहुंचा लेकिन उसे वहां पहुंचते-पहुंचते लगभग 6 महीने लग गए. कोर्ट के मुताबिक 20 हफ्तों से ज्यादा की प्रेग्नैंसी में बच्चे को गिराया नहीं जा सकता इसलिए 10 साल की बच्ची बनी मां और उसने एक बच्चे को जन्म दिया.

 

दस साल की बच्ची को मां बनाकर इस देश ने एक रिकॉर्ड तो कायम कर ही लिया है लेकिन अब एक रिकॉर्ड और सुन लीजिए. जब उस नाबालिग बच्ची की नवजात बेटी ने कुछ बातें की तो ये भी रिकॉर्ड बनने के लायक बन गई. चलिए जानते हैं उस बच्ची ने जन्म लेते क्या कहा होगा ?…

आंख खुलते ही वो बच्ची ने अपने आप से कहती है ”ये मैं कहां लेटी हूं ? ये मेरे बगल में कौन है ?”

जवाब आया तो उसने कहा, ”क्या कहा? ये मेरी मां है ! लेकिन, ये तो मेरी बड़ी बहन जैसी दिख रही है. ये मेरी मां कैसे हो सकती है ! ”

फिर जवाब आया तो उस नवजात बच्ची ने बोला, ”क्या कहा, इसका रेप हुआ था और उसी के नतीजे में मैं पैदा हुई हूं ? कहीं मेरा जन्म भारत में तो हो गया ? मां मुझे तु्म्हारे ऊपर गुस्सा भी आ रहा है और दया भी आ रही क्योंकि मुझसे पहले तो ये तुम्हारा दुर्भाग्य है कि तु्म्हारा जन्म बेटी के रूप में भारत में हुआ. जहां हर 15 मिनट में एक बलात्कार होता है. गुस्सा तो मुझे तुम्हारी मां पर आ रही है जिसने तुम्हे ये नहीं बताया कि किसी के भी छूने में प्यार और हवस को कैसे पहचाना जाता है.

”मेरे सवालों का जवाब मुझे चाहिए”

 

वैसे इस हवस शब्द से ध्यान आया कि वो वहशी कौन था ? सुना है कि वो तुम्हारा सगा मामा था? कहने को ये रिश्तेदार हैं लेकिन ऐसे दरिंदे रोज किसी अपने को शिकार बना लेते है. मामा से तो खून का रिश्ता होता है ना अब मैं इससे ज्यादा क्या कहूं, जब इसी देश में कहीं न कहीं एक बाप या बेटा रोज अपनी ही बेटी या बहन के साथ बलात्कार कर रहे हैं तो. भारत में 95 प्रतिशत रेपिस्ट अपने ही जान-पहचान वालों में निकल जाते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता वाली बात ये है कि एक तिहाई केस में ऐसी वारदातों को रिश्तेदार ही अंजाम दे रहे हैं. अब कैसे कोई बच्ची अपने मामा, चाचा, पिता या भाई की गोद में बैठेंगी ? अफसोस की बात है लेकिन भगवान ने मुझे उस मां की झोली में डाल दिया जो अपने ही मामा की शिकार हो गई है. शर्मनाक….बहुत शर्मनाक.

”अब सवाल डॉक्टर साहब से”

 

उस नवजात शिशु, जो अस्पताल के बेड पर लेटी थी अपनी नाबालिग मां के साथ उसने डॉक्टर की तरफ नजर की और कहा, ”मेरे सामने ये जो डॉक्टर साहब खड़े हैं, ये मुझे कामयाबी के साथ दुनिया में ले आए अब इन्होंने अपने करियर में एक रिकॉर्ड तो बना लिया लेकिन मैं इनसे पूछती हूं कि एक 10 साल की बच्ची की प्रैग्नेंसी की बात सुनकर इऩ्हें उसपर तरस नहीं आया ? ये पढ़े-लिखे थे, ये कानून के पास जाकर मेरी नाबालिग मां को न्याय दिला सकते थे लेकिन इन्हें तो रिकॉर्ड बनाना था क्योंकि एक 10 साल की बच्ची की डिलीवरी करवाकर इन्हें विदेशों तक अपनी लोकप्रियता पहुंचानी थी.

जब इन्होंने सुना कि 10 साल की बच्ची बलात्कार का शिकार हो चुकी है तो इनकी मानवता क्यों सामने नहीं आई ? इन्होंने कोर्ट में जाकर क्यों नहीं कहा कि 10 साल की बच्ची एक बच्चे को जन्म देने के लिए ना तो शारीरिक रूप से तैयार होती है और ना मानसिक रूप से. माना कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के अनुसार जब तक गर्भवती की जान को खतरा न हो, वो अबॉर्शन नहीं करा सकती लेकिन डॉक्टर साहब मेरे इस दुनिया में आने पर अब दो जिंदगियों की हालत मौत से भी बदतर हो गई है और इसके जिम्मेदार सिर्फ आप हैं.

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”कोर्ट भी है जिम्मेदार”

 

उस बच्ची ने सबके लिए शिकायत की जिसमें कोर्ट भी शामिल था. उस बच्ची ने कोर्ट के विषय में आगे कहा,”क्या जज साहब आपके न्याय खूब लोकप्रिय रहे इसके लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं ? किसी भी इंसान या लड़की के दर्द का कोई मोल नहीं आपकी नजर में ? एक 10 साल की बच्ची पहले ही किसी की हवस का शिकार हो चुकी है और अब उसका साथ देने के बजाए आपने उसे मां बनने की सजा देदी जिसे वो जिंदगी भर भुगतेगी.  क्या आपने मेरी मां के साथ सच में न्याय किया है ? मेरी मां के मामले में अंतिम फैसला आते-आते 6 महीने लग गए और आपने उसे गर्भपात करने का हक भी नहीं दिया. बहुत शर्म आती है मुझे भारत के कानून पर.

”देश के प्रधानमंत्री भी हैं जिम्मेदार”

 

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाले नरेंद्र मोदी जी मेरे इस सवाल का जवाब दीजिए कि आपने तो महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के वायदे के साथ वोट मांगे थे ना ? फिर क्या हुआ उस वायदे का, क्या सरकार बनते आप अपने देश की बेटियों को भूल गए?

अब आप बताइए कि मेरा क्या होगा ? मेरी मां तो स्कूल जाने से रही क्योंकि ऐसे मामले में कोई रेप पीड़ित को आपका समाज स्कूल की दहलीज तक तो पहुंचने देगा नहीं और साथ ही मेरी जिंदगी भी बर्बाद. लोग मुझे एक बलात्कार से जन्मी बच्ची का नाम देंगे मैं कैसे इस समाज में पढ़ूंगी और बढ़ूंगी ?

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