अकेला नहीं था मन्नान वानी, इन युवाओं ने भी पकड़ी आतंकवाद की राह

जम्मू-कश्मीर में सेना के ऑपरेशन में दो आतंकवादी मारे गए। इनमें से एक की पहचान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व शोध छात्र मन्नान वानी के रूप में हुई है। यह बात सामने आते ही यह मुद्दा फिर सिर उठाने लगा है कि क्यों पढ़े-लिखे लोग आतंकवाद के रास्ते पर चलने लगते हैं। मन्नान वानी इस साल पहला ऐसा स्थानीय युवक था जो आतंकी संगठन में शामिल हुआ। इस साल इन युवाओं ने किताबें छोड़ कर बंदूक थामी…
इन्होंने पकड़ा आतंकवाद का हाथ
मन्नान बशीर वानी
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पीएचडी स्कॉलर मन्नान बशीर वानी जोकि टिकिपोरा लोलाब कुपवाड़ा का रहने वाला था। वानी इस साल पहला ऐसा स्थानीय युवा बना जो आतंकवाद में शामिल हुआ था। उसकी फोटो 7 जनवरी को वायरल हुई थी और उसे हमजा भाई का खिताब दिया गया था। वानी गुरिवार को एक मुठभेड़ में मारा गया। 

जुनैद अहमद सहराई
घाटी में सक्रिय तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सहराई का बेटा 24 मार्च को हिज्ब में शामिल हुआ था। अशरफ सहराई के बेटे की हाथों में एके-47 रायफल लिए एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस फोटो के अनुसार जुनैद अहमद सहराई आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था और उसे अमार भाई का कोड नाम भी मिला है।

एमफिल स्कॉलर जुबैर अहमद वानी 
20 अप्रैल को दक्षिणी कश्मीर के दहरुना गांव के जुबैर अहमद वानी की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें वो बंदूक लिए हुए था। वायरल फोटो पर दी गई जानकारी के अनुसार आतंकी बना युवा एमफिल स्कॉलर था। जुबैर अहमद वानी पुत्र मोहम्मद अफजल वानी बीते कुछ दिनों से लापता था और फिर सोशल मीडिया पर हथियार समेत उसकी फोटो वायरल हुई थी। वो आतंकी संगठन हिज्ब में शामिल था। 

असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद रफीक
मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले का रहने वाला कश्मीर यूनिवर्सिटी का असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद रफीक भट 4 मई को यूनिवर्सिटी से निकला और 6 मई को दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में एक मुठभेड़ के दौरान उसके मारे जाने की खबर मिली। उसने 2017 नवंबर में सोशियोलॉजी में पीएचडी की थी और कश्मीर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हुआ था। वो हिज्ब के मारे गए 5 आतंकियों में से एक था।

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