कूड़ेदान में मिली मासूम बच्ची ने तोड़ा दम, कलयुगी मां ने जुर्म कबूला

- in अपराध, दिल्ली, राज्य

राजधानी दिल्ली में झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर इलाके में कूड़े में पड़ी मिली मासूम ने जीटीबी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. पुलिस बच्ची को कूड़ेदान में फेंकने के शक में उसकी कलयुगी मां को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.

आरोपी मां 25 वर्षीय नेहा तिवारी ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है. पुलिस ने बताया कि पहले आरोपी मां के खिलाफ हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन अब उसमें हत्या की धारा भी जोड़ दी गई है.

इस तरह पकड़ी गई कलयुगी हत्यारिन मां

विनोद नगर में शुक्रवार को किसी राहगीर को कूड़ेदान से एक मासूम बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वहां हड़कंप मच गया. लोगों ने जाकर देखा तो पॉलिथीन में लपेटकर कूड़ेदान में नवजात बच्ची को फेंका गया था. तुरंत लोगों ने पुलिस को सूचित किया.

लोगों की शिकायत पर मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को कूड़ेदान से निकाला और पता करने की कोशिश करने लगी कि वहां बच्ची को किसने फेंका. तभी भीड़ में शामिल एक बच्चे ने नवजात बच्ची को पहचान लिया और पुलिस को लावारिस बच्ची के माता-पिता के घर का पता बताया.

बच्चे ने बताया कि उसने एक महिला को वहां वह पैकेट फेंकते हुए देखा था. बच्चे ने पुलिस को महिला का हुलिया भी बताया. उसने बताया कि उसने बच्ची के माता-पिता को यह कहते हुए सुना था कि उनकी बेटी खो गई है.

मासूम बेटी को फेंककर बनाया खोने का बहाना

मूलरूप से उत्तर प्रदेश में कानपुर की रहने वाली नेहा अपने पति सौरभ तिवारी के साथ ईस्ट विनोद नगर में रहती है. सौरभ ट्रैवल एजेंट है और घर से ही काम करता है. करीब 25 दिन पहले नेहा ने एक बच्ची को जन्म दिया.

देखभाल के लिए सौरभ की मां भी कानपुर से यहां आई हुई थीं. शुक्रवार की शाम सौरभ अपनी मां के साथ घर से बाहर गया हुआ था. शाम करीब 7:15 बजे जब वह घर पहुंचे तो दरवाजा बाहर से बंद था. इसी दौरान पत्नी भी रोते हुए पहुंची और बताया कि बच्ची मिल नहीं मिल रही है.

बच्ची के रोने से परेशान होकर उठाया खौफनाक कदम

इस कलयुगी मां की ममता का सोता मात्र 25 दिन में ही सूख गया. 25 दिन पहले प्यारी सी बच्ची को जन्म देने वाली इस कलयुगी मां की ममता को मरता देख मासूम ने भी अपनी आंखें मूंद लीं.

आरोपी नेहा ने पुलिस को बताया कि उसे बच्ची को पालने में काफी दिक्कत हो रही थी. बच्ची के रोने और रात में जागने की वजह से उसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी तबाह होती दिख रही थी. महज इतनी सी वजह के चलते वह बच्ची को बोझ की तरह देखने लगी थी. इसी कारण उसने यह कदम उठाया.

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