चीनी वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, बंदरों में विकसित कराई कोरोना से लड़ने की क्षमता

जहां से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला, वहां से एक अच्छी खबर आ रही है. यानी चीन से. चीन के वुहान से पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस की वजह से 170,740 लोग संक्रमित हुए हैं. जबकि, 6687 लोगों की मौत हुई है. अब एक अच्छी खबर चीन से ये आई है कि चीन के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में कुछ बंदरों को कोरोना वायरस संक्रमित किया था. अब इन बंदरों के शरीर ने इस वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक शक्ति) हासिल कर ली है. 

बंदरों द्वारा कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित करने का मतलब ये हैं कि इंसान भी अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करके इस बीमारी से लड़ सकता है. यानी अब इन बंदरों के शरीर से एंटीबॉडीज लेकर नए वैक्सीन बनाए जा सकते हैं. एंटीबॉडीज हमारे शरीर में रहने वाले वो सिपाही हैं जो बाहर से होने वाले बैक्टीरिया और वायरस के हमले से बचाते हैं. बीमारियों से लड़ते हैं और हमें किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाते हैं. 

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चीन के वैज्ञानिक अब बंदर से लिए गए एंटीबॉडीज का इंसानों पर परीक्षण एक महीने में शुरू करेंगे. सिर्फ इतना ही नहीं, जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, उनके एंटीबॉडीज को लेकर भी चीन वैक्सीन बनाने की तैयारी में है. आपको बता दें कि चीन में अब तक 75 हजार से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से मुक्त हो चुके हैं. यानी ठीक हो चुके हैं. अब इनके शरीर से एंटीबॉडीज लेकर वैक्सीन विकसित किया जाएगा. साथ ही उसे बंदरों के एंटीबॉडीज से मिलाकर देखा जाएगा कि कितनी समानता है.

लोगों को यह भी डर है कि अगर उन्हें दोबारा कोरोना वायरस हो गया तो. आपको बता दें कि दोबारा कोरोना वायरस का संक्रमण सिर्फ 0.1 से 1 फीसदी लोगों को ही हो रहा है. इसलिए वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि एक बार वैक्सीन विकसित होने के बाद किसी को दोबोरा कोरोना का संक्रमण होता है तो भी उसे आसानी से ठीक कर लिया जाएगा.

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