नहाय खाय के साथ शुरू हुआ चार दिनों के लोक आस्था का महापर्व
पटना.चार दिनों तक चलने वाले लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत नहाय खाय से साथ हो गई। छठव्रतियों ने मंगलवार सुबह से गंगा नदी में स्नान कर प्रसाद बनाना शुरू कर दिया है।नयाह खाय का खाना महिलाएं शुद्ध घी में बनाती हैं। इसके बाद वे भोजन कर पूजा की शुरुआत करती हैं। छठ साल में दो बार होता है। इस महापर्व में छठी मईया और सूर्य की उपासना होती है।

लौकी की सब्जी और चावल खाने की है परंपरा…
– छठ पर्व साल में दो वार एक चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में होता है, लेकिन कार्तिक माह में होने वाले पर्व का विशेष महत्व है।
– हिंदू धर्म के दूसरे पर्व की तरह इस पर्व की शुरुआत भी स्नान के साथ होती है। चार दिन तक चलने वाले पर्व के पहले दिन को नहाय-खाय कहते हैं।
– छठ पर्व के पहले दिन व्रती स्नान करने के लिए सुबह से ही गंगा नदी में पहुंचने लगीं थीं।
– लोगों ने तालाब, कुआं या फिर नल के पानी से स्नान कर अपनी चार दिनों तक चलने वाली अनुष्ठान की शुरुआत की।
– हिंदू धर्म के दूसरे पर्व की तरह इस पर्व की शुरुआत भी स्नान के साथ होती है। चार दिन तक चलने वाले पर्व के पहले दिन को नहाय-खाय कहते हैं।
– छठ पर्व के पहले दिन व्रती स्नान करने के लिए सुबह से ही गंगा नदी में पहुंचने लगीं थीं।
– लोगों ने तालाब, कुआं या फिर नल के पानी से स्नान कर अपनी चार दिनों तक चलने वाली अनुष्ठान की शुरुआत की।
मिट्टी के चुल्हे पर बनाया प्रसाद
– गंगा स्नान करने के बाद महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बना रही हैं। आज चने की दाल, लौकी की सब्जी और बासमती चावल का प्रसाद बनाया जा रहा है।
– भोजन में सरसो तेल और नमक की जगह घी और सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं भगवान गणेश और सूर्य का भोग लगाकर भोजन ग्रहण करती हैं। इसके बाद घर के बाकी सदस्य यहीं खाना खाते हैं।
– भोजन में सरसो तेल और नमक की जगह घी और सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं भगवान गणेश और सूर्य का भोग लगाकर भोजन ग्रहण करती हैं। इसके बाद घर के बाकी सदस्य यहीं खाना खाते हैं।
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कल खरना, खीर और रोटी के साथ शुरू होगा निर्जला व्रत
– बुधवार को खरना है। खरना में छठ व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं। शाम को स्नान कर, नए कपड़े पहनकर प्रसाद बनाती हैं।
– मिट्टी के चूल्हे पर बना प्रसाद ज्यादा महत्व रखता है। शुद्ध दूध में खीर बनाया जाता है, इसके साथ रोटी बनायी जाती है।
– व्रती खीर और रोटी भगवान को भोग लगाती हैं इसके बाद हवन करती हैं। अंत में वे खीर रोटी के प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
– बाद में यहीं प्रसाद घरवाले खाते हैं। जिनके घर छठ नहीं हो रहा होता है उन्हें प्रसाद के रूप में खीर रोटी दिया जाता है।
– खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है। तीसरे दिन शाम को व्रती पूरे परिवार के साथ घाट पर पूजा करेंगी।
– सभी व्रती नदी किनारे फल-फूल और पकवान बना कर सूर्य के साथ छठी मैया की पूजा करती हैं। इसके बाद डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
– छठ पूजा के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को व्रती अर्घ्य देकर छठी मईया और दीनानाथ (सूर्य ) से आशीर्वाद मांगती हैं।
– इसके बाद घाट से लौटकर व्रती अपना 36 घंटों का उपवास तोड़ती हैं।
– मिट्टी के चूल्हे पर बना प्रसाद ज्यादा महत्व रखता है। शुद्ध दूध में खीर बनाया जाता है, इसके साथ रोटी बनायी जाती है।
– व्रती खीर और रोटी भगवान को भोग लगाती हैं इसके बाद हवन करती हैं। अंत में वे खीर रोटी के प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
– बाद में यहीं प्रसाद घरवाले खाते हैं। जिनके घर छठ नहीं हो रहा होता है उन्हें प्रसाद के रूप में खीर रोटी दिया जाता है।
– खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है। तीसरे दिन शाम को व्रती पूरे परिवार के साथ घाट पर पूजा करेंगी।
– सभी व्रती नदी किनारे फल-फूल और पकवान बना कर सूर्य के साथ छठी मैया की पूजा करती हैं। इसके बाद डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
– छठ पूजा के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को व्रती अर्घ्य देकर छठी मईया और दीनानाथ (सूर्य ) से आशीर्वाद मांगती हैं।
– इसके बाद घाट से लौटकर व्रती अपना 36 घंटों का उपवास तोड़ती हैं।





