पंजाब में एक बार फिर केजरीवाल को मैदान में उतारने की तैयारी

चंडीगढ़। पंजाब में आम आदमी पार्टी के सात विधायकों की बगावत के बाद घमासान और तेज होता जा रहा है। इस सियासी जंग में विदेशी चंदा भी आप से फिसल रहा है। यही वजह है कि अब पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर से पंजाब में उतारने की तैयारी पार्टी ने शुरू कर दी है। आप को पंजाब में आर्थिक रूप से खड़ा करने के पीछे विदेश में बैठे पंजाबियों का खासा हाथ रहा है। चंदे के रूप में विदेश से पार्टी को आने वाले करोड़ों रुपये भी अब एनआरआइ द्वारा खैहरा गुट को समर्थन के बाद बंटवारे की भेंट चढ़ रहे हैं।पंजाब में एक बार फिर केजरीवाल को मैदान में उतारने की तैयारी

नेता प्रतिपक्ष पद से हटाए गए सुखपाल सिंह खैहरा गुट की तरफ से बीती दो अगस्त को बठिंडा में बुलाई गई कन्वेंशन के मंच से एक दर्जन से ज्यादा बार खुलकर मंच संचालकों ने कन्वेंशन की सफलता के लिए एनआरआइज का धन्यवाद किया था। इससे पहले ही एक दर्जन से ज्यादा देशों में बैठे एनआरआइज की तरफ से केजरीवाल को पत्र लिखकर खैहरा को पद से हटाने के फैसले को वापस लेने की मांग भी की गई थी। विधानसभा चुनाव में भी एनआरआइज व कट्टरपंथियों के दम पर आप ने पंजाब की सत्ता में आने की कोशिश की थी, लेकिन पंजाब के लोगों ने नकार दिया था।

पार्टी को अब यह बात समझ आ गई है कि अगर पंजाब में दोबारा पैर जमाने हैं तो एनआरआइज का सहयोग जरूरी है। यही वजह है कि पार्टी एक बार फिर से पंजाब में केजरीवाल को आगे लाने की कवायद कर रही है। वे अक्टूबर में पंजाब का दौरा करेंगे। इसके लिए विशेष तौर पर मनीष सिसोदिया की ड्यूटी लगाई गई है।

पार्टी की कोशिश है कि केजरी के दौरे से पहले प्रदेश प्रभारी सिसोदिया पंजाब में माहौल बना दें। 13 अगस्त को सिसोदिया जालंधर में आप नेताओं व कार्यकर्ताओं की बैठक करके सांसद भगवंत मान और विधायक अमन अरोड़ा की प्रधान व उप प्रधान पद पर फिर से ताजपोशी कर सकते हैैं। उसके बाद सितंबर में फिर सिसोदिया दौरा करके सारी तैयारियों का जायजा लेंगे।

चूंकि इस बार एनआरआइ (अनिवासी भारतीय) आप के बजाय खैहरा गुट के साथ खड़े हो गए हैं इसीलिए पार्टी ने बागी होने के बाद भी खैहरा व उनके समर्थक 6 विधायकों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की है, लेकिन महिला विधायकों को आगे करके खैहरा को कठघरे में जरूर खड़ा करने की कवायद की जा रही है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बार एनआरआई पूरी तरह से खुलकर खैहरा के पक्ष में आने को तैयार हैं।

केजरीवाल के पास कोई और विकल्प न होने के चलते ही मान को एनआरआइ के मद्देनजर ही आगे किया जा रहा है। मान व केजरीवाल के करीबी रिश्तों के चलते ही चार माह बाद भी मान के इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि केजरीवाल द्वारा नशे के आरोपों पर शिअद महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगने के बाद मान व अरोड़ा ने प्रदेश अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

15 व 26 को आएगी तस्वीर सामने

खैहरा गुट के अलग होने के बाद पंजाब में आप में कितना दम बचा है इसका पता 15 अगस्त को इसड़ू (लुधियाना) और 26 अगस्त को बाबा बकाला (अमृतसर) में होने वाली कांफ्रेंस के बाद चलेगा। बीते साल पार्टी ने अपनी जमीनी हकीकत को समझते हुए ये कांफ्रेंस नहीं की थी। विधानसभा चुनाव के बाद स्थानीय निकाय चुनावों में पंजाब के मतदाताओं द्वारा नकारी गई आप के सफाए की रही सही कसर दो अगस्त को खैहरा गुट ने बठिंडा में कन्वेंशन आयोजित कर पूरी कर दी है जिसमें करीब 15 हजार लोग जुटे थे। 12 अगस्त से खैहरा गुट पंजाब आप के नए धड़े के गठन की घोषणा कर चुका है।

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