अमृत से कम नहीं है ये पत्ता, आपको कभी बीमार नहीं होने देगा

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गिलोय इतनी गुणकारी औषधि है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। पान के पत्ते की तरह गिलाय के पत्तों का उपयोग बहुत फायदेंमंद है। यह शरीर में वात, कफ और पित्तनाशक का कार्य करता है। गिलोय में मौजूद एंटीबायोटिक और पित्तनाशक का कार्य करता है। गिलोय में मौजूद एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्वों का वर्णन आयुर्वेद में मिलता है। गिलोय (Giloy) शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर शरीर में खून की कमी को दूर करनेे में भी लाभकारी है। रोजाना सुबह-शाम गिलोय (heart-leaved moonseed) का रस घी और शहद के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती

आधुनिक विज्ञान की अनेक शोधों में भी यह साबित हो गया है की गिलोय बीमारियों से बचाने तथा चिकित्सा दोनों ही रूप में बहुत उपयोगी है। Researchers के अनुसार गिलोय में anti inflammatory, analgesic, antipyretic तथा immune booster जैसे अनेक गुण पाए जाते हैं।

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चिकनगुनिया जैसे वायरल बुखार जो ठीक होने के बाद भी रोगी को महीनों तक जोड़ों के दर्द से परेशान करते रहते हैं, ऐसे मामलों में गिलोय प्रकृति द्वारा हमें दिया गया एक बेहतरीन उपहार है आयुर्वेद में तो गिलोय को अनेक बीमारियों में उपयोगी माना ही गया है

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