परमाणु समझौते को लेकर विवादों के बीच ईरानी, प्रेसिडेंट रूहानी का का स्वागत करेगा चीन

बीजिंग: ईरानी राष्ट्रपति अपने चीनी और रूसी समकक्षों के साथ अगले माह मुलाकात करेंगे. चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अपने ईरानी समकक्ष हसन रूहानी का स्वागत शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान करेंगे. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के पीछे हटने और ईरान पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करने के बाद इस मुलाकात के मायने काफी बढ़ गए हैं.परमाणु समझौते को लेकर विवादों के बीच ईरानी, प्रेसिडेंट रूहानी का का स्वागत करेगा चीन

चीन ने अगले महीने होने वाले शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति को आमंत्रित किया हैं. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रपति हसन रूहानी रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान के समकक्षों के साथ इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे। यह सम्मेलन 9 जून से 10 जून तक किंगदाओ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता में होगा.

यह निमंत्रण ऐसे मौके पर दिया गया है, जब अमेरिका ने ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया चीन के उप विदेश मंत्री झैंग हनहुई ने कहा कि बीजिंग ने आशा व्यक्त की कि संयुक्त समग्र कार्ययोजना (जेसीपीओए) जारी रहेगा और चीन इस समझौते को लेकर यूरोपीय देशों के संपर्क में है.

उप विदेश मंत्री हनहुई ने कहा, “अगर जेसीपीओए को आगे लागू नहीं किया जा सकता तो प्रासंगिक देशों के बीच सामान्य आर्थिक सहयोग प्रभावित होगा .. हमें उम्मीद है कि चीन और ईरान दोनों पक्षों के बीच सहयोग परियोजनाओं में बड़ी बाधा से बचेंगे.” 2015 में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले चीन, रूस और यूरोपीय शक्तियां इस समझौते को बचाने के प्रयास कर रही हैं. चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग  ईरानी प्रेेेेसिडेंट हसन रूहानी का स्वागत शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान करेंगे.

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बताया कि चिंगदाओ में 9-10 जून को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अपने ईरानी समकक्ष हसन रूहानी से मुलाकात करेंगे. उन्होंने बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. वांग ने शिखर सम्मेलन के औपचारिक एजेंडे में परमाणु समझौते का जिक्र नहीं किया. ईरान का शीर्ष व्यापारिक साझेदार और उसके कच्चे सामानों का सबसे बड़ा खरीदार बीजिंग पहले ही संकेत दे चुका है कि अमेरिका के पीछे हटने के बावजूद वह इस्लामिक शासन के साथ काम करना जारी रखेगा.

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