क्या आप भी तनाव को दूर करने के लिए देखतें है अश्लील वीडियोज, तो हो जाइये सावधान भूलकर भी न करें ये 5 काम

हाल ही में अमेरिका के हवाई में मिसाइल अटैक की गलत सूचना से लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई थी। एक एडल्ट फिल्म वाली वेबाइट का दावा है कि इस दौरान लोग इतने तनाव में थे कि उन्होंने पोर्न वीडियोज देखकर अपना स्ट्रेस दूर किया।
दरअसल, कोर्टिसोल तनाव पैदा करने वाला हार्मोन है। शरीर में इस हार्मोन के बढ़ने से आपके मन में डर, तनाव और एंग्जायटी की भावना पैदा होती है। रोजाना ऑफिस और घरेलू कामों से आपको थकावट महसूस होती होगी। इतनी व्यस्त दिनचर्या और रात में देर से सोने से आपकी सेहत पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे तनाव भी होता होगा। ऐसे में तनाव से आराम के लिए एक्सरसाइज एक अच्छा तरीका है। एक्सरसाइज करने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर कम करने में मदद मिलती है। इससे शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव होता है, जो मूड को खुश रखने वाला हार्मोन है। इसलिए कोर्टिसोल के स्तर को सही रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें। इससे तनाव कम होने के साथ-साथ आपको अन्य स्वास्थ्य लाभ भी मिलेंगे।
दौड़ना
दौड़ना सबसे अच्छा शारीरिक अभ्यास माना जाता है। इससे न केवल शरीर से पसीना निकलता है, बल्कि इससे शारीरिक और मानसिक स्तर पर भी अच्छा महसूस होता है। दौड़ने से शरीर का निचला हिस्सा मजबूत होता है। इंसुलिन बनने की प्रक्रिया में सुधार होता है और शरीर में शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।
दौड़ना सबसे अच्छा शारीरिक अभ्यास माना जाता है। इससे न केवल शरीर से पसीना निकलता है, बल्कि इससे शारीरिक और मानसिक स्तर पर भी अच्छा महसूस होता है। दौड़ने से शरीर का निचला हिस्सा मजबूत होता है। इंसुलिन बनने की प्रक्रिया में सुधार होता है और शरीर में शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।
योग
योग व मेडिटेशन करने से कोर्टिसोल का स्तर कम होता है, जिससे आप खुश रहते हैं। ये हमारे दिमाग में सकारात्मक विचार पैदा करते हैं। मेडिटेशन तनाव कम करने में फायदेमंद होता है और लंबे समय तक तनाव कम करता है। ‘ओम’ का उच्चारण करने से भी आपके कोर्टिसोल का स्तर 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। लेकिन इसे नियमित रूप से करना जरूरी है।
योग व मेडिटेशन करने से कोर्टिसोल का स्तर कम होता है, जिससे आप खुश रहते हैं। ये हमारे दिमाग में सकारात्मक विचार पैदा करते हैं। मेडिटेशन तनाव कम करने में फायदेमंद होता है और लंबे समय तक तनाव कम करता है। ‘ओम’ का उच्चारण करने से भी आपके कोर्टिसोल का स्तर 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है। लेकिन इसे नियमित रूप से करना जरूरी है।
ताई ची
यह शारीरिक अभ्यास की एक तकनीक है, जिसमें प्रमुख रूप से छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है। जिससे शारीरिक ताकत बढ़ने के साथ ही मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। इसमें शारीरिक गतिविधियों और सांस पर नियंत्रण रखते हुए शारीरिक अभ्यास किया जाता है। इसे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का एक प्रकार माना जाता है। मन और शारीरिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखकर ताई ची तनाव से आराम के लिए एक अच्छा शारीरिक अभ्यास माना गया है। यह इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। गठिया और हृदय संबंधी समस्याओं से भी बचाव करता है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया द्वारा किए गए शोध के अनुसार, ताई ची पीठ का दर्द कम करने में भी मदद करता है।
यह शारीरिक अभ्यास की एक तकनीक है, जिसमें प्रमुख रूप से छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है। जिससे शारीरिक ताकत बढ़ने के साथ ही मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। इसमें शारीरिक गतिविधियों और सांस पर नियंत्रण रखते हुए शारीरिक अभ्यास किया जाता है। इसे मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का एक प्रकार माना जाता है। मन और शारीरिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखकर ताई ची तनाव से आराम के लिए एक अच्छा शारीरिक अभ्यास माना गया है। यह इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। गठिया और हृदय संबंधी समस्याओं से भी बचाव करता है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया द्वारा किए गए शोध के अनुसार, ताई ची पीठ का दर्द कम करने में भी मदद करता है।
पिलेट्स
यह तनाव से आराम पाने व वजन कम करने की शारीरिक क्रिया है। यह शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करने, शरीर में लचीलापन बढ़ाने और धैर्य बनाए रखने में मदद करता है। दफ्तर में लगातर कुर्सी पर बैठकर काम करने से पॉस्चर खराब होने लगता है, जिसका बुरा असर ज्वाइंट व मांसपेशियों पर पड़ता है। पिलेट्स से शरीर के पॉस्चर को सही रखा जा सकता है।
यह तनाव से आराम पाने व वजन कम करने की शारीरिक क्रिया है। यह शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करने, शरीर में लचीलापन बढ़ाने और धैर्य बनाए रखने में मदद करता है। दफ्तर में लगातर कुर्सी पर बैठकर काम करने से पॉस्चर खराब होने लगता है, जिसका बुरा असर ज्वाइंट व मांसपेशियों पर पड़ता है। पिलेट्स से शरीर के पॉस्चर को सही रखा जा सकता है।
किक बॉक्सिंग
ज्यादा मात्रा में ऊर्जा की खपत करने वाला वर्कआउट करने से शरीर से एंडोर्फिन्स नामक हार्मोन्स बनते हैं, जिसे सेहत के लिए अच्छा माना गया है। किक बॉक्सिंग अभ्यास करने से मन से निराशा दूर होती है, तनाव से आराम मिलता है और एकाग्रता बढ़ती है। इससे शरीर और दिमाग के निर्णय लेने का हिस्सा अच्छा होता है। इस प्रकार आपको जब भी समय मिलता है, तो इन अभ्यासों को आजमाकर शरीर को
ज्यादा मात्रा में ऊर्जा की खपत करने वाला वर्कआउट करने से शरीर से एंडोर्फिन्स नामक हार्मोन्स बनते हैं, जिसे सेहत के लिए अच्छा माना गया है। किक बॉक्सिंग अभ्यास करने से मन से निराशा दूर होती है, तनाव से आराम मिलता है और एकाग्रता बढ़ती है। इससे शरीर और दिमाग के निर्णय लेने का हिस्सा अच्छा होता है। इस प्रकार आपको जब भी समय मिलता है, तो इन अभ्यासों को आजमाकर शरीर को





