स्टिंग ऑपरेशन की बदली स्क्रिप्ट के साथ कई राज भी दफन हो गए। क्या पूरा सच यही है जो पुलिस दिखा रही है, या फिर कुछ और पर्दे के पीछे रह गया है। मुख्यमंत्री के वो कौन करीबी हैं, जिनकी रिकॉर्डिंग की गई।
रिकॉर्डिंग में क्या कुछ ऐसा था, जो सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकता था? प्रदेश के मुखिया से जुड़े मामले में सीधे तौर पर कार्रवाई के बजाय सीईओ की स्टिंग की सुपारी के उलट नई सुपारी देने के पीछे का पूरा सच क्या यही है। ऐसे कई सुलगते सवाल है, जिनके जवाब सरकार और पुलिस को आगे चलकर देने होंगे।
निसंदेह निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार स्टिंग ऑपरेशनों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। इसमें किसी को शक नहीं है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश का स्टिंग का प्रयास हुआ होगा।
दर्ज मुकदमे में कुछ लोगों की रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया गया है
इस पूरे मामले में बड़ा तथ्य है कि सीएम से संबंध रखने वाले वो कौन लोग थे, जिनका स्टिंग किया गया। क्या रिकॉर्डिंग में कुछ आपत्तिजनक था।
आयुष गौड़ की तरफ से राजपुर थाने में दर्ज मुकदमे में कुछ लोगों की रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया गया है। क्या स्टिंग के बदले किसी तरह की ब्लैकमेलिंग की गई थी? क्या स्टिंग की असली स्क्रिप्ट यही है, या फिर उसमें किसी तरह का बदलाव हुआ है? बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री और बड़े नौकरशाह से जुड़े मामले में कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।
इन तमाम सवालों के जवाब अभी पुलिस अधिकारियों के पास नहीं हैं। हालांकि अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है कि चैनल के आयुष गौड़ की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ है। विवेचना प्रचलित है, जिस तरह के तथ्य आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच रणनीति के तहत आयुष गौड़ को सोमवार को मीडिया के सामने लाने की तैयारी है, ताकि स्टिंग की पूरी कहानी पर मुहर लगवाई जा सके।