अगर आप ‘इंक्वायरी’ के भरोसे पहुंचे स्टेशन तो ट्रेन ढूंढ़ते रह जाएंगे

घोटाला जमीन-स्टांप या रुपये का ही नहीं, वक्त का भी हो सकता है। उत्तर भारत के कई स्टेशनों पर ऐसा ही घोटाला हो रहा है। रेलवे इंक्वायरी, वेबसाइट और अनाउंसमेंट के मुताबिक ट्रेनें स्टेशन पहुंच चुकी होती हैं जबकि वास्तव में उनकी लोकेशन आउटर पर होती है। इससे लाखों यात्री और उन्हें लेने के लिए स्टेशन पहुंचने वाले परेशान हो रहे हैं। कागज पर ‘पंक्चुअलिटी’ सुधारने के लिए यह किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में हकीकत जानने की कोशिश की तो टाइमिंग घोटाला उजागर हुआ।

यहां हो चुके हैं मामले-
गोरखपुर: 4 सितंबर को चौरीचौरा एक्सप्रेस सुबह 6:45 बजे कैंट स्टेशन पर थी जबकि ट्रेन के गोरखपुर जंक्शन पहुंचने की सूचना वेबसाइट, इंक्वायरी और स्टेशन एनाउंसमेंट केंद्र से मिलने लगी। लखनऊ से आ रही इण्टरसिटी एक्सप्रेस डोमिनगढ़ स्टेशन पर रात 9:35 बजे पहुंची। उस वक्त इस ट्रेन के गोरखपुर जंक्शन पहुंचने का एनाउंसमेंट हो रहा था।
देहरादून: 7 सितंबर को शताब्दी (12017) के देहरादून पहुंचने का समय इंक्वायरी पर दोपहर एक बजे बताया गया जबकि ट्रेन 1.15 बजे पहुंची। वेबसाइट पर दर्शाया गया कि शताब्दी 12.50 बजे ही देहरादून स्टेशन पर पहुंच गई।
पटना: 6 सितंबर को पटना जंक्शन पर रांची जनशताब्दी रात 10.45 बजे पहुंची, लेकिन इस ट्रेन को नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम में 10.15 फीड कर दिया गया। धनबाद पटना इंटरसिटी 6 सितंबर को शाम 5.45 बजे पटना जंक्शन पहुंची, लेकिन नेशनल ट्रेन इंक्वायरी में समय शाम 5.10 बजे फीड किया गया।
प्रभु ने दी थी चेतावनी
रेलवे सूत्रों के मुताबिक पूर्व रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने ट्रेनों की पंक्चुअलिटी घटने पर अफसरों को सख्त चेतावनी दी थी। उसके बाद ट्रेनों का समय तो नहीं सुधरा, टाइमिंग घोटाला जरूर होने लगा। प्रभु ने अफसरों से कहा था कि 2015-16 में ट्रेनों की औसत पंक्चुअलिटी 84 फीसदी थी। 2016-17 में यह 79 क्यों रह गई?
यह है पंक्चुअलिटी
कुल ट्रेनों में कितनी ट्रेनें समय से चल रही हैं, यह पंक्चुअलिटी है। मसलन जोन में चल रही 100 ट्रेनों में 80 ट्रेनें समय से चल रही हैं, तो उस जोन में ट्रेनों की पंक्चुअलिटी 80 फीसदी है। पंक्चुअलिटी ज्यादा दिखाने से उस रेल जोन की छवि बेहतर बनती है।
| जोन | पंक्चुअलिटी |
| पूर्व रेलवे | 96 फीसदी |
| पूर्वोत्तर रेलवे | 91 फीसदी |
| पूर्व-मध्य रेलवे | 76 फीसदी |
| एसईसी रेलवे | 93 फीसदी |
| पश्चिम मध्य रेलवे | 84 फीसदी |
2016-17 में पंक्चुअलिटी में आई गिरावट
| पूर्व रेलवे | 8.9 फीसदी |
| पूर्वोत्तर रेलवे | 11 फीसदी |
| पूर्व मध्य रेलवे | 10 फीसदी |
| एसईसी रेलवे | 11 फीसदी |
| पश्चिम मध्य रेलवे | 8 फीसदी |
(इसी गिरावट के कारण ही सुरेश प्रभु ने चेतावनी दी थी)
गलत समय भरने को लेकर दो कंट्रोलर को चार्जशीट दी गई है। सभी को सख्त हिदायत दी गई है कि ट्रेनों का गलत समय न भरें।
संजय यादव, सीपीआरओ, पूर्वोत्तर रेलवे





