दवाएं और जांच से अस्पतालों को कमाते तो सुना होगा, क्या आप जानते हैं मरीजों के ‘मल’ से भी होती है कमाई

सरकारी अस्पतालों में बाहरी दवाएं और मेडिकल जांच के किस्से अकसर सुनने में आते हैं। लेकिन आश्चर्य है कि यहां मरीजों के मलसे हर
महीने उगाही होती है। दिल्ली के अस्पतालों में यह धंधा तेजी से चल पड़ा है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को मल उठाने के लिए हर आठ घंटे का 400 और दिन भर का 1200 रुपये बाहरी कर्मचारी को देना पड़ता है। अगर कोई मरीज कोमा में है और उसके परिजन मल उठाने में असमर्थ है तो उसे हर महीने 36 हजार रुपये प्राइवेट कर्मचारी को देने पड़ते हैं। जिन्हें अस्पताल के ही कर्मचारियों के जरिये मिलवाया जाता है। पिछले दिनों इस तरह की शिकायतें दिल्ली स्वास्थ्य विभाग से लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंची हैं। जिनमें सरकारी अस्पतालों के इस गोरखधंधे को उजागर किया है।शिकायत नंबर एक
भजनपुरा निवासी दुष्यंत दुबे ने शिकायत में लिखा है कि 10 फरवरी को उनकी 90 वर्षीय दादी को बेहोशी की हालत में इहबास में भर्ती करवाया था। चूंकि दादी अचेत अवस्था में थी उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। मल को लेकर जब आईसीयू में मौजूद कर्मचारियों से कहा तो उन्होंने महिला कर्मचारी होने से इंकार कर दिया। साथ ही सलाह दी कि यहां आने वाले हरे मरीज को बाहरी कर्मचारी की सेवा लेनी पड़ती है। जिसके बाद उन्होंने 1200 रुपये प्रतिदिन पर कर्मचारी को रखा। दुष्यंत ने बताया कि वह प्राइवेट कर्मचारी कोई और नहीं बल्कि अस्पताल में ही ठेके पर रखे गए हाउस कीपिंग स्टाफ है। जिन्हें ड्यूटी नहीं मिल पाती है।
भजनपुरा निवासी दुष्यंत दुबे ने शिकायत में लिखा है कि 10 फरवरी को उनकी 90 वर्षीय दादी को बेहोशी की हालत में इहबास में भर्ती करवाया था। चूंकि दादी अचेत अवस्था में थी उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। मल को लेकर जब आईसीयू में मौजूद कर्मचारियों से कहा तो उन्होंने महिला कर्मचारी होने से इंकार कर दिया। साथ ही सलाह दी कि यहां आने वाले हरे मरीज को बाहरी कर्मचारी की सेवा लेनी पड़ती है। जिसके बाद उन्होंने 1200 रुपये प्रतिदिन पर कर्मचारी को रखा। दुष्यंत ने बताया कि वह प्राइवेट कर्मचारी कोई और नहीं बल्कि अस्पताल में ही ठेके पर रखे गए हाउस कीपिंग स्टाफ है। जिन्हें ड्यूटी नहीं मिल पाती है।
शिकायत नंबर दो
कानपुर निवासी रमेश मिश्रा ने बताया कि पिछले तीन महीने से उनकी पत्नी सीमा मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं। अचेत होने की वजह से उन्हें आईसीयू में रखा है। मल उठाने के कर्मचारियों ने उनसे भी यहीं बातें कहीं। जिस पर उन्होंने आपत्ति भी जताई। अस्पताल प्रबंधन से गुजारिश की लेकिन सुनवाई नहीं होने पर स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग को शिकायत कर दी।
कानपुर निवासी रमेश मिश्रा ने बताया कि पिछले तीन महीने से उनकी पत्नी सीमा मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं। अचेत होने की वजह से उन्हें आईसीयू में रखा है। मल उठाने के कर्मचारियों ने उनसे भी यहीं बातें कहीं। जिस पर उन्होंने आपत्ति भी जताई। अस्पताल प्रबंधन से गुजारिश की लेकिन सुनवाई नहीं होने पर स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग को शिकायत कर दी।
कर्मचारी ही करता है साफ
उधर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज अगर अक्षम है तो उसके मल की सफाई वहां मौजूद कर्मचारी करेगा। जो मरीज चेतन अवस्था में हैं उन्हें टॉयलेट पैन लाकर दिया जाएगा। साथ ही उस पर बैठने में मदद भी की जाएगी। लेकिन विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि दिल्ली सरकार के किसी अस्पताल के आईसीयू में ऐसा नहीं होता।
उधर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज अगर अक्षम है तो उसके मल की सफाई वहां मौजूद कर्मचारी करेगा। जो मरीज चेतन अवस्था में हैं उन्हें टॉयलेट पैन लाकर दिया जाएगा। साथ ही उस पर बैठने में मदद भी की जाएगी। लेकिन विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि दिल्ली सरकार के किसी अस्पताल के आईसीयू में ऐसा नहीं होता।
हर जगह ऐसी ही नौबत
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस तरह की घटनाओं से सरोकार रखने की बात कही। उन्होंने बताया कि दिल्ली ही नहीं, बल्कि ज्यादातर सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में इस तरह की समस्या देखने को मिल रही है। कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस पर कार्रवाई भी हुई है। अबकी बार सरकार इस दिशा में भी विचार कर रही है। ताकि अच्छे से मरीजों की सेवा हो सके।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस तरह की घटनाओं से सरोकार रखने की बात कही। उन्होंने बताया कि दिल्ली ही नहीं, बल्कि ज्यादातर सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में इस तरह की समस्या देखने को मिल रही है। कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस पर कार्रवाई भी हुई है। अबकी बार सरकार इस दिशा में भी विचार कर रही है। ताकि अच्छे से मरीजों की सेवा हो सके।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस तरह का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। लेकिन आईसीयू केयर में मौजूद कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह मरीज का मल साफ करे। अगर ऐसा नहीं है तो इसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।- डा. कीर्ति भूषण, महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं
इस तरह का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। लेकिन आईसीयू केयर में मौजूद कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह मरीज का मल साफ करे। अगर ऐसा नहीं है तो इसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।- डा. कीर्ति भूषण, महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं
आईसीयू में मरीज को यह सुविधा अस्पताल की तरफ से ही मिलना चाहिए। मामला जैसे ही मेरे संज्ञान में आया, इस पर जांच बिठा दी है। साथ ही दिल्ली सरकार के अन्य अस्पतालों की व्यवस्था का जायजा भी लेंगे कि वहां क्या स्थिति है।- डा. निमेष देसाई, निदेशक, इहबास
नर्सिंग ऑफिसरों के कार्यों के विभाजन की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग के साथ चल रही है। जिस पर अभी फैसला होना बाकी है। अभी तक इस संबंध में सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट नियम नहीं होने से ये समस्या पैदा होती है।-लीलाधर रामचंदानी, महासचिव, दिल्ली नर्सेस फेडरेशन





