पूर्णिमा पर गर्भधारण किया तो पति ने गर्भवती पत्नी को पीटा, जानें क्यों?

21वीं सदी में हमने चाहे जितनी ही तरक्की क्यों न कर ली हो लेकिन अंधविश्वास का दीमक अभी भी कहीं-न-कहीं समाज को खोखला बना रहा है. अंधविश्वास का ऐसा ही एक मामला IT हब माने जाने वाले महाराष्ट्र के शहर पुणे से सामने आया है. यहां पिंपरी चिंचवड़ के थोरगांव में रहने वाले एक अंधविश्वासी व्यक्ति ने अपनी गर्भवती पत्नी की सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी क्योंकि उसने पूर्णिमा के दिन गर्भधारण किया था. उसने पत्नी के पेट पर घूंसे भी मारे. हालांकि अस्पताल में इलाज के लिए जाने पर डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा ठीक है. महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति, सास-ससुर और दो ननदों को गिरफ्तार किया है. 

महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी 2017 में हुई थी. पहले तो उसके गर्भवती होने की खबर सुनकर परिवार वाले बहुत खुश हुए. लेकिन, जैसे ही उन्हें पता चला कि गर्भधारण पूर्णिमा के दिन हुआ है, वह उसे मानसिक और शारीरिक यातनाएं देने लगे. दरअसल, महिला के पति को किसी ने बताया था कि पू्र्णिमा पर गर्भधारण होने से बेटी पैदा होती है और परिवार वालों को बेटा चाहिए.

गर्भवति पत्नी के पेट पर मारे घूसे

महिला ने बीते रविवार वाकड़ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उसके पति, सास-ससुर और दो ननदों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस उपायुक्त गणेश शिंदे ने बताया कि पीड़ित महिला अपने पति और ससुराल वालों के साथ थोरगांव में एक किराए के मकान में रहती है. उसका 28 वर्षीय पति एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करता है. पुलिस उपायुक्त ने बताया कि मामले में IPC की धारा 315 (शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. 

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ससुराल वालों ने की गर्भपात करवाने की कोशिश

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके ससुराल वाले जबरदस्ती उसका गर्भपात करवाना चाहते थे. वो उससे इस तरह की एक्सरसाइज करने के लिए कहते जिससे उसका गर्भपात हो जाए. उसने बताया कि वह जब गर्भवती हुई तो उसका पति और घर वाले उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने लगे. बीते शनिवार को पति और ससुराल वालों ने बेरहमी से उसके पेट पर घूंसे मारे. किसी तरह वह वहां से बचकर पुलिस के पास पहुंची. आपको बता दें कि  पुलिसकर्मियों ने ही महिला को अस्पताल पहुंचाया.  

पढ़े लिखों का अंधविश्वासी होना निराशाजनक

वहीं, पूरे मामले पर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिती के सदस्य मिलिंद देशमुख ने कहा कि पढ़े-लिखे लोगों द्वारा इतना अंधविश्वासी होना निराशाजनक है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमारी कोशिश होगी कि दोषियों को सख्त सजा मिले. 

 
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